Dimple Mehta vs Marathi Asmita (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Dimple Mehta MNS Controversy: महाराष्ट्र के मीरा-भाईंदर शहर में मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से डिंपल मेहता ने मेयर पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है, और चूंकि वे एकमात्र उम्मीदवार हैं, इसलिए उनका मेयर बनना लगभग तय है। हालांकि, इस फैसले ने शहर में ‘मराठी बनाम अमराठी’ के मुद्दे को हवा दे दी है। डिंपल मेहता के नाम की घोषणा के बाद से ही स्थानीय मराठी समुदाय और विभिन्न राजनीतिक संगठनों में तीव्र आक्रोश देखा जा रहा है। विशेष रूप से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और मराठी एकीकरण समिति ने इस कदम को मराठी अस्मिता का अपमान बताया है।
आज जब डिंपल मेहता मेयर पद का कार्यभार संभालने जा रही हैं, उसी समय मराठी एकीकरण समिति ने नगर निगम मुख्यालय के बाहर बड़े आंदोलन की घोषणा की है। समिति की मांग है कि मीरा-भाईंदर जैसे शहर में, जो आगरी-कोली समुदाय और मराठी भाषियों का गढ़ है, वहां मेयर भी मराठी ही होना चाहिए। पुलिस ने इस आंदोलन को रोकने के लिए आयोजकों को नोटिस जारी किया है, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
मराठी एकीकरण समिति के अध्यक्ष गोवर्धन देशमुख ने भाजपा के इस फैसले पर कड़ा प्रहार किया है। उनका कहना है कि भाजपा केवल मतों के लिए मराठी मानुस का इस्तेमाल करती है। देशमुख ने आरोप लगाया कि डिंपल मेहता को दोबारा मेयर बनाना ‘घरानाशाही’ का प्रतीक है, क्योंकि उनके परिवार का पहले से ही राजनीति में वर्चस्व है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मंत्री रवींद्र चव्हाण से अपील की है कि वे स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए किसी मराठी चेहरे को यह जिम्मेदारी सौंपें।
ये भी पढ़ें- मनपा का सख्त रुख, चुनाव के बाद 8 डीपी सड़कों पर अतिक्रमण हटाओ अभियान तेज; आयुक्त के सख्त निर्देश
प्रदर्शनकारियों ने सुभाष चंद्र बोस मैदान से नगर निगम मुख्यालय तक विशाल मोर्चा निकालने की योजना बनाई है। हालांकि, प्रशासन ने इस मोर्चे को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नोटिस भेजकर सूचित किया है कि वे केवल निर्धारित मैदान में ही अपना विरोध दर्ज कराएं और सड़क पर कानून-व्यवस्था न बिगाड़ें। इसके बावजूद, आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनसुना कर डिंपल मेहता को पदभार दिलाया गया, तो वे अपने विरोध को और अधिक उग्र करेंगे।
भाजपा के इस निर्णय के खिलाफ केवल सामाजिक संगठन ही नहीं, बल्कि विपक्षी दल भी एकजुट हो गए हैं। शिवसेना (UBT) और मनसे ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह जानबूझकर मराठी अस्मिता को दरकिनार कर रही है। संगठनों का तर्क है कि मीरा-भाईंदर की भूमि पुत्रों (आगरी-कोली) की उपेक्षा करना आने वाले समय में भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है। इस विवाद ने शहर के सामाजिक और राजनीतिक वातावरण को बेहद संवेदनशील बना दिया है, जिससे नगर निगम कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।