मीरा-भाईंदर में स्वास्थ्य सेवा वेंटिलेटर पर! 13 लाख की आबादी, 145 डॉक्टरों के पद खाली; आखिर कब सुधरेंगे हालात?
Mira Bhayandar Health News: मीरा-भाईंदर में डॉक्टरों की भारी कमी से स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। 347 स्वीकृत पदों में से 145 खाली हैं। गरीब महंगे निजी अस्पतालों में जाने पर मजबूर है।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
MBMC Doctor Vacancy Crisis: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में तेजी से विकसित हो रहे मीरा भाईंदर शहर में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत चिंता पैदा करने वाली है। एक ओर जहां शहर की जनसंख्या 13 लाख के पार पहुंच चुकी है, वहीं दूसरी ओर मनपा के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की भारी कमी ने आम नागरिकों के लिए इलाज को मुश्किल बना दिया है। बढ़ते प्रदूषण, यातायात और दुर्घटनाओं के बीच मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था उस अनुपात में मजबूत नहीं हो पाई है।
मीरा भाईंदर मनपा में डॉक्टरों के कुल 347 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से केवल 202 पद ही भरे गए हैं, जबकि 145 पद अभी भी रिक्त हैं। स्थायी डॉक्टर 117 में से 82 कार्यरत, 35 पद रिक्त और अस्थायी डॉक्टर 230 में से 120 कार्यरत, 110 पद रिक्त हैं। डॉक्टरों की इस भारी कमी के कारण मनपा के कई स्वास्थ्य केंद्र बिना डॉक्टरों के ही संचालित हो रहे हैं। जबकि कुछ स्थानों पर डॉक्टर रोटेशन के आधार पर या सीमित समय के लिए सेवाएं दे रहे हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाल स्थिति
शहर में कुल 35 स्वास्थ्य विस्तार केंद्र हैं, लेकिन इनमें केवल 6 डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे है। नतीजतन, ये केंद्र हर दूसरे दिन या दो दिन में एक बार ही खुलते हैं। इसके अलावा 11 नागरिक स्वास्थ्य केंद्र, 11 अपना औषधालय, 11 बालासाहेब ठाकरे अपना अस्पताल है। इन सभी केंद्रों पर मरीजों का दबाव बढ़ता जा रहा है, लेकिन पर्याप्त डॉक्टरों के अभाव में सेवाएं प्रभावित हो रही है।
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निजी अस्पतालों की ओर बढ़ती मजबूरी
सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधा और डॉक्टर उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। यहां इलाज महंगा होने के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सरकारी अस्पतालों पर बढ़ता बोझ
शहर में प्रमुख सरकारी और मनपा अस्पतालों में 200 बिस्तरों वाला भीमसेन जोशी सरकारी अस्पताल, 50 बिस्तरों वाला इंदिरा गांधी अस्पताल, 100 बिस्तरों वाला मातोश्री इंदिराबाई सरनाईक कैशलेस अस्पताल है। जिसमें गांधी अस्पताल मुख्यतः मातृ एवं शिशु सेवाओं के लिए है। इन अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन संसाधनों और डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
डॉक्टरों की कमी दूर नहीं की तो बढ़ेगी परेशानी
पूर्व पार्षद ओमप्रकाश गाड़ोदिया ने कहा कि मीरा-भाईदर में स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते डॉक्टरों की कमी दूर नहीं की गई और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है, मनपा प्रशासन को इस दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि शहर के लाखों नागरिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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MBMC वैद्यकीय अधिकारी डॉ. नंदकिशोर लहाने ने बताया कि डॉक्टरों के रिक्त पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें एमबीबीएस डॉक्टर्स के आवेदन मंगाए गए थे, लेकिन उस समय भर्ती प्रक्रिया में प्रयाप्त संख्या में डॉक्टर्स ने रुचि नहीं दिखाई। उसके बाद चुनाव की आचार संहिता लग गई। अब पुनः भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू की जाने वाली है, तथा इस बार एमबीबीएस डॉक्टर्स के अलावा बीएएमएस डॉक्टर्स को भी शामिल किया जाना है। जिससे सभी रिक्त पदो पर शीघ्र डॉक्टर उपलब्ध हो जाएगे।
– नवभारत लाइव के लिए ठाणे से विनोद मिश्रा की रिपोर्ट
