Thane News: सियासत में महिला शक्ति की अग्निपरीक्षा, 4 पूर्व महापौरों की साख दांव पर
Women Mayors: मीरा-भाईंदर मनपा चुनाव में चार पूर्व महिला महापौरों की साख दांव पर है, जहां महिला नेतृत्व, अनुभव और बदलती राजनीतिक निष्ठाओं की अग्निपरीक्षा हो रही है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Women Mayors:मीरा-भाईंदर मनपा चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Meera Bhayandar: मीरा-भाईंदर की राजनीति में महिलाओं का दबदबा कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2002 में मनपा की स्थापना के बाद हुए चार चुनावों में ढाई-ढाई वर्षों के कार्यकाल के तहत कुल छह बार महापौर की कुर्सी महिलाओं के हाथों में रही है।
अब उसी गौरवशाली परंपरा के बीच चार पूर्व महिला महापौर एक बार फिर चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। आगामी मनपा चुनाव में ये चारों अलग-अलग वार्डों से अपनी किस्मत आजमा रही हैं। इनमें से तीन भाजपा और एक शिवसेना के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। दिलचस्प यह है कि जहां महापौर पद पर महिलाओं का वर्चस्व रहा है, वहीं उपमहापौर पद पर अब तक लगभग हमेशा पुरुष ही काबिज रहे हैं।
अनुभव और वापसी की चुनौती: निर्मला सावल
मनपा गठन के बाद दूसरी महापौर बनीं निर्मला सावले कभी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का प्रमुख चेहरा रही हैं। वर्तमान में वे आरपीआई कोटे से भाजपा के चुनाव चिह्न पर वार्ड 18 से चुनाव लड़ रही हैं। उनके लिए यह चुनाव राजनीतिक पुनर्स्थापना का एक बड़ा अवसर माना जा रहा है।
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विरासत, विद्रोह और नई परीक्षा: कैटलिन परेरा
पूर्व विधायक स्वर्गीय गिल्बर्ट मेंडोंसा की बेटी कैटलिन परेरा वर्ष 2012 में एनसीपी से महापौर बनी थीं। वर्ष 2017 में उन्होंने शिवसेना में प्रवेश किया और बाद में शिंदे गुट के साथ चली गईं। उनका राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वर्तमान में वे शिवसेना की ओर से भाईंदर पश्चिम के वार्ड 8 से चुनाव मैदान में हैं।
फिर जनता के बीच: डिंपल मेहता
वर्ष 2017 में भाजपा की बहुमत वाली सत्ता के दौरान महापौर बनीं डिंपल मेहता को भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता के छोटे भाई की पत्नी होने के कारण विशेष पहचान मिली। अब वे मीरा रोड के वार्ड 12 से एक बार फिर चुनावी रण में उतर चुकी हैं।
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आरक्षण से नेतृत्व तक: ज्योत्सना हसनाले
वर्ष 2022 में मनपा के अंतिम कार्यकाल की महापौर रहीं ज्योत्सना हसनाले अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित पद से नेतृत्व में आईं। भाजपा की ओर से काशिमीरा के वार्ड 14 से निर्वाचित हसनाले अब उसी वार्ड से दोबारा जनता का भरोसा मांग रही हैं।
फिर एक बार जनता की अदालत में
मीरा-भाईंदर का यह चुनाव केवल वार्ड जीतने की लड़ाई नहीं है, बल्कि महिला नेतृत्व की साख, अनुभव बनाम जनादेश और बदलती राजनीतिक निष्ठाओं की अग्निपरीक्षा भी है। अब देखना यह होगा कि जनता किसे दोबारा ताज पहनाती है और किसे सियासी इतिहास का हिस्सा बना देती है।
