ठाणे सड़क हादसे में मृत एसी तकनीशियन के परिवार को मिलेगा 54.62 लाख रुपये मुआवजा, MACT ने जारी किया आदेश
Thane Road Accident: ठाणे एमएसीटी ने 2021 में सड़क हादसे का शिकार हुए एक एसी तकनीशियन के परिवार को 54.62 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश बीमा कंपनी को दिया है।
- Written By: रूपम सिंह
न्यायाधिकरण आदेश ( सोर्स सोशल मीडिया )
Thane MACT Motor Accident Claims Tribunal: मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने वर्ष 2021 में एक सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले एयर कंडीशनर तकनीशियन के परिवार को 54.62 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। न्यायाधिकरण ने ट्रक की बीमा कंपनी को यह राशि दावेदारों को अदा करने तथा बाद में बीमा शर्तों के उल्लंघन के कारण संबंधित परिवहन कंपनी से इसकी वसूली करने का निर्देश दिया है।
एमएसीटी के सदस्य आर. वी. मोहिते ने 6 जून को पारित अपने आदेश में कहा कि दुर्घटना के लिए ट्रक चालक की लापरवाही जिम्मेदार थी और मृतक के आश्रितों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए। दावेदारों में मृतक की पत्नी, पुत्र और मां शामिल हैं।
मामले के अनुसार, उदयभान बंसराज गुप्ता एयर कंडीशनर तकनीशियन के रूप में कार्यरत थे। 23 मार्च 2021 को वह ठाणे जिले के डोंबिवली से नवी मुंबई के तुर्भे क्षेत्र की ओर अपने स्कूटर से जा रहे थे। इसी दौरान महापे-इंदिरा नगर मार्ग पर पीछे से तेज गति से आ रहे एक ट्रक ने उनके स्कूटर को टक्कर मार दी। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनकी मृत्यु हो गई।
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मृतक के परिजनों ने न्यायाधिकरण में मुआवजे का दावा दायर करते हुए कहा कि दुर्घटना पूरी तरह ट्रक चालक की लापरवाही का परिणाम थी। वहीं ट्रक की बीमा कंपनी ने दावे का विरोध करते हुए तर्क दिया कि मृतक स्वयं लापरवाही से वाहन चला रहे थे और उनके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।
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दुर्घटना के समय नहीं था चालक के पास वैध लाइसेंस
हालांकि, न्यायाधिकरण ने उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि मृतक के पास वर्ष 2025 तक वैध ड्राइविंग लाइसेंस था। न्यायाधिकरण ने यह भी माना कि दुर्घटना को टालने का अंतिम अवसर ट्रक चालक के पास था, लेकिन उसने आवश्यक सावधानी नहीं बरती।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि ट्रक के पास वैध फिटनेस प्रमाणपत्र और परमिट मौजूद थे, लेकिन दुर्घटना के समय उसका चालक वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस के बिना वाहन चला रहा था। इसे बीमा शर्तों का उल्लंघन मानते हुए न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी को पहले मुआवजा राशि का भुगतान करने और बाद में वाहन मालिक परिवहन कंपनी से उसकी वसूली करने की अनुमति दी। न्यायाधिकरण के इस फैसले से मृतक के परिवार को आर्थिक राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
