कल्याण डोंबिवली के ठाकरे गुट के नेता (सोर्स: सोशल मीडिया)
Kalyan Dombivali Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में ‘पार्टी और प्रतीक’ की लड़ाई अब जमीनी स्तर पर तेज हो गई है। कल्याण डोंबिवली महानगर पालिका (KDMC) में सत्ता समीकरणों को लेकर मची खींचतान के बीच, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने अपने उन पार्षदों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है, जिनके शिंदे गुट के संपर्क में होने की खबरें आ रही थीं।
कल्याण डोंबिवली की स्थानीय राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब यह खबर फैली कि शिवसेना ठाकरे गुट के दो निर्वाचित नगरसेवक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल हो सकते हैं। इन अफवाहों को भांपते हुए, ठाकरे गुट के जिला प्रमुख शरद पाटिल ने सक्रियता दिखाई और सीधे संबंधित पार्षदों के आवास पर दस्तक दी।
पार्टी ने किसी भी संभावित फूट को रोकने के लिए कानूनी और संगठनात्मक घेराबंदी शुरू कर दी है। इसी क्रम में कल्याण डोंबिवली मनपा के पार्षद मधुर म्हात्रे के पिता और पार्षद कीर्ति ढोने की बहन को औपचारिक नोटिस थमाया गया है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि पार्षदों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा।
ठाकरे गुट द्वारा जारी इस नोटिस में आगामी पार्टी मीटिंग का हवाला दिया गया है। जिला प्रमुख ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पार्टी ग्रुप के गठन और रणनीतिक चर्चा के लिए बुलाई गई बैठकों में इन पार्षदों की उपस्थिति अनिवार्य है। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि वे इन महत्वपूर्ण बैठकों से दूरी बनाते हैं, तो इसे ‘पार्टी विरोधी गतिविधि’ माना जाएगा।
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दिलचस्प बात यह है कि नोटिस सीधे पार्षदों के बजाय उनके परिजनों को दिया गया है। जानकारों के अनुसार, यह एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है ताकि स्थानीय स्तर पर सामाजिक और पारिवारिक प्रभाव के जरिए पार्षदों को पाला बदलने से रोका जा सके।
वर्तमान में KDMC की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर है जहां हर एक पार्षद का वोट और समर्थन ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकता है। ऐसे में शिंदे गुट की बढ़ती सक्रियता ने ठाकरे कैंप की चिंता बढ़ा दी है, जिसका नतीजा इस कड़े नोटिस के रूप में सामने आया है। अब देखना यह है कि क्या ये पार्षद पार्टी की बैठक में शामिल होकर अपनी वफादारी साबित करते हैं या कोई नया सियासी उलटफेर देखने को मिलता है।
– कल्याण से नवभारत लाइव के लिए अशोक वर्मा की रिपोर्ट