Chandrapur Municipal Corporation:चंद्रपुर महानगरपालिका (सोर्सः सोशल मीडिया)
Political Crisis Chandrapur: चंद्रपुर महानगरपालिका चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से सत्ता का पेंच फंस गया है। अब दोनों दलों ने सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेने के लिए जोड़-तोड़ और राजनीतिक गणित बैठाना शुरू कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ऑपरेशन लोटस की आशंका को देखते हुए कांग्रेस ने अपने सभी पार्षदों को नागपुर तलब किया है। इसी बीच कांग्रेस में सांसद प्रतिभा धानोरकर और विधायक विजय वडेट्टीवार के बीच गुटनेता पद को लेकर विवाद खुलकर सामने आ गया है। दोनों नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज होने से पार्टी के अंदरूनी समीकरण और अधिक उलझ गए हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह सत्ता संघर्ष किस मोड़ पर जाकर थमेगा। उधर, महापौर पद को लेकर शिवसेना (यूबीटी) और भाजपा के बीच भी जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। शिवसेना (यूबीटी) के जिला प्रमुख संदीप गिरहे के एक बयान ने राजनीतिक हलचल और तेज कर दी है, वहीं भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
चंद्रपुर महानगरपालिका में सत्ता संतुलन की स्थिति बनने से अब छोटी पार्टियों की भूमिका निर्णायक होती जा रही है। इसी क्रम में शिवसेना (यूबीटी) के जिला प्रमुख संदीप गिरहे ने बड़ा बयान देते हुए कहा, “समझौते का समय अब खत्म हो गया है। जो पार्टी हमें महापौर बनाने के लिए तैयार होगी, हम उसी का साथ देंगे।”
इस बयान से महाविकास आघाड़ी और संभावित गठबंधनों में भी खलबली मच गई है। हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और सहयोगी पार्षदों का दावा है कि शिवसेना (यूबीटी) के बिना भी वे बहुमत का आंकड़ा छू सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस द्वारा यूबीटी को दरकिनार कर सत्ता गठन की तैयारी किए जाने पर सभी की निगाहें अब शिवसेना (यूबीटी) के अगले कदम पर टिकी हैं।
कांग्रेस और भाजपा दोनों के पास महानगरपालिका में सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत नहीं है। इस बीच कांग्रेस के भीतर यह सवाल अहम बन गया है कि पहले गुटनेता कौन होगा और फिर महापौर का फैसला कैसे होगा। सूत्रों के अनुसार, इस विषय पर सोमवार को नागपुर में पार्टी नेताओं की बैठक हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। कांग्रेस के कुल 27 पार्षद निर्वाचित हुए हैं, जिनमें से 15 पार्षद सांसद प्रतिभा धानोरकर के समर्थन में बताए जा रहे हैं, जबकि 12 पार्षद विधायक विजय वडेट्टीवार के साथ माने जा रहे हैं।
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भाशेकाप के पार्षद पप्पू देशमुख ने कहा, “हमने चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था और सत्ता के लिए समर्थन का वादा किया था। हम अपनी बात पर कायम हैं। लेकिन यदि कांग्रेस किसी ऐसे पूर्व पार्षद को सत्ता में शामिल करती है, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भ्रष्टाचार का समर्थन करता हो, तो हम तटस्थ रहने पर विचार करेंगे।”
भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “किसी भी हालत में शिवसेना (यूबीटी) को महापौर पद नहीं दिया जाएगा। भाजपा अपने संख्याबल और सहयोगी दलों के साथ मिलकर अपना महापौर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम विपक्ष में बैठने को तैयार हैं।”