JNPA की बढ़ीं रफ्तार, युद्ध के बावजूद नहीं रुकी सप्लाई चेन, भारत के सबसे बड़े पोर्ट ने रचा इतिहास
Jawaharlal Nehru Port (JNPA): वैश्विक तनाव के बावजूद JNPA का रिकॉर्ड प्रदर्शन। मार्च 2026 में कंटेनर ड्वेल टाइम घटकर 22.68 घंटे रहा। जानें कैसे डीपीडी और डीपीई ने बदली पोर्ट की सूरत।
- Written By: प्रिया जैस
जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (सौजन्य-सोशल मीडिया)
JNPA Port Operational Performance: भारत के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (JNPA) ने मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक व्यवधानों के बावजूद प्रमुख प्रदर्शन मानकों को बनाए रखते हुए उल्लेखनीय परिचालन प्रदर्शित किया है।
ऐसे समय में जब वैश्विक आपूर्ति चेन में अभी भी अनिश्चितता का सामना कर रही हैं, जेएनपीए ने सक्रिय योजना, संसाधनों के कुशल उपयोग और हितधारकों के साथ घनिष्ठ समन्वय के माध्यम से पोर्ट प्रचलन को सुचारु बनाए रखा है। जेएनपीए में आयात कंटेनरों का ड्वेल टाइम उल्लेखनीय रूप से बेहतर हुआ है, जो फरवरी 2026 के 25.17 घंटे से घटकर मार्च 2026 में 22.68 घंटे रह गया। यह माल निकासी की बढ़ी हुई दक्षता और सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं को दर्शाता है।
डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी से मिला फायदा
डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी (डीपीडी) और डायरेक्ट पोर्ट एंट्री (डीपीई) जैसे दक्षता-आधारित प्रमुख पहल मजबूत प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान डीपीडी 74.57 प्रतिशत और डीपीई 45.74 प्रतिशत पर रहा, जिससे माल की तेज आवाजाही और भीड़भाड़ में कमी सुनिश्चित हुई। औसत घूमाव समय 22.61 घंटे रहा, जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी पोतों के कुशल प्रचलन को बनाए रखने की जेएनपीए की क्षमता को दर्शाता है।
सम्बंधित ख़बरें
आषाढ़ी एकादशी पर यात्रियों को राहत, मध्य रेल चलाएगी मिरज-दादर वन-वे स्पेशल ट्रेन, जानें रूट और टाइमिंग
बेटिकट रेल यात्रियों पर मध्य रेलवे का बड़ा एक्शन, पहली तिमाही में वसूला ₹101 करोड़ का रिकॉर्ड जुर्माना
फ्यूजन क्लासरूम एडुटेक का IPO 31 जुलाई को खुलेगा, ₹151-₹159 प्राइस बैंड तय, जानें इश्यू से जुड़ी पूरी डिटेल
हमें न्यायवाला चाहिए चाय वाला नहीं… मुंबई में बना जंतर मंतर-2, उमड़ा युवाओं का सैलाब, देखें Video
निर्यात कंटेनरों में भंडारण
ट्रांसशिपमेंट कंटेनरों के आने जाने में उल्लेखनीय वृद्धि होने के बावजूद, जिसमें मात्रा 5 प्रतिशत से बढ़कर 16 प्रतिशत हो गई है, जेएनपीए ने परिचालन दक्षता को बनाए रखा है। जेएनपीटी पर पर्याप्त भंडारण क्षमता भी उपलब्ध है, जहां वर्तमान में कंटेनर रखने की कुल क्षमता का केवल लगभग 50 प्रतिशत ही उपयोग में है।
यह भी पढ़ें – पहले शिवसेना, फिर NCP और अब JDU की बारी? BJP का सियासी खेल, बिहार में ऐसे बदला पूरा ‘गेम’!
निर्यात कंटेनरों के भंडारण के लिए पत्तन परिसर में अतिरिक्त 9.2 एकड़ क्षेत्र आवंटित किया गया है। साथ ही, रीफर कंटेनरों की उपयोग दर भी लगभग 50 प्रतिशत पर बनी हुई है। जेएनपीए ने सक्रिय रूप से कदम उठाते हुए एक समर्पित टास्क फोर्स का गठन किया है, साथ ही टर्मिनल प्रचालकों और अन्य हितधारकों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखा है।
