मीरा-भाईंदर के घोड़बंदर में CRZ क्षेत्र में अवैध RCC निर्माण, मनपा की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल
Mira Bhayandar के घोड़बंदर क्षेत्र में सीआरजेड प्रतिबंध के बावजूद अवैध आरसीसी निर्माण शुरू होने से मनपा प्रशासन की सख्ती पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
- Written By: अपूर्वा नायक
मीरा भाईंदर मनपा (सौ. सोशल मीडिया )
Ghodbunder Civic Corruption Allegations: मीरा-भाईंदर मनपा प्रशासन अवैध निर्माणों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का ढोल पीट रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इस दावे की धज्जियां उड़ाती नजर आ रही है।
प्रभाग क्रमांक 4 अंतर्गत घोड़बंदर क्षेत्र में राज बकेट कम्पाउंड के अंदर स्थित डायनाट्रॉन कंपनी परिसर में एक बार फिर आरसीसी का अवैध निर्माण धड़ल्ले से किया जा रहा है।
यह वही भूखंड है, जो सीआरजेड (तटीय विनियमन क्षेत्र) से बाधित बताया जा रहा है। नियमों के अनुसार ऐसे क्षेत्र में निर्माण कार्य पर सख्त प्रतिबंध है। गौरतलब है कि लगभग दो वर्ष पूर्व तत्कालीन प्रभाग अधिकारी कंचन गायकवाड़ ने इसी स्थान पर अवैध निर्माण को तोड़क कार्रवाई कर ध्वस्त कर दिया था, लेकिन अब उसी स्थान पर पुनः निर्माण शुरू होना यह दर्शाता है कि अवैध निर्माणकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं और प्रशासनिक पकड़ ढीली पड़ चुकी है।
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कागजों में सख्ती, जमीन पर ढिलाई
महापौर डिंपल मेहता ने अवैध निर्माणों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का स्पष्ट निर्देश दिया था। उनसे पहले मनपा आयुक्त राधाबिनोद शर्मा ने भी सभी छह प्रभागों से साप्ताहिक रिपोर्ट मांगते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा था कि उनके क्षेत्र में कोई अवैध निर्माण न हो, यहां तक चेतावनी भी दी गई थी कि शिकायत मिलने पर संबंधित प्रभाग अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन सवाल यह है कि यदि साप्ताहिक रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत हो रही है, तो घोडबंदर में यह निर्माण कार्य किसकी आखों के सामने चल रहा है। क्या रिपोटों में वास्तविक स्थिति छुपाई जा रही है या फिर जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आआंखें मूंदे बैठे हैं।
आर्थिक सांठगांठ के आरोप
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि कथित आर्थिक सांठगांठ के चलते भूमाफियाओं को खुली छूट दी जा रही है। आरोप है कि कुछ जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय मौन स्वीकृति प्रदान कर रहे हैं। यदि यह सच है तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी पर भी सीधा प्रहार है।
जनता का गुस्सा और मांग
- स्थानीय नागरिकों में रोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि सीआरजेड जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी खुलेआम निर्माण हो सकता है, तो फिर कानून का अस्तित्व ही क्या रह जाता है?
- नागरिकों ने उच्च स्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त करने की मांग की है।
- अब देखना यह है कि प्रशासन अपने ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे को व्यवहार में उतारता है या फिर यह मामला भी फाइलों और बैठकों तक ही सीमित रह जाएगा।
- फिलहाल घोड़बंदर में खड़ा हो रहा यह ढांचा मनपा की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा है।
जिम्मेदार कौन ?
- मनपा के सभी छह प्रभागों में अवैध निर्माण रोकने के लिए बीट मार्शल, कनिष्ठ अभियंता, प्रभाग अधिकारी, अतिक्रमण नियंत्रक अधिकारी और अतिक्रमण विभाग के उपायुक्त, अतिरिक्त आयुक्त तक को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- इतने स्तरों की निगरानी व्यवस्था होने के बावजूद यदि अवैध आरसीसी ढांचा खड़ा हो रहा है, तो यह साफ संकेत है कि या तो व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है या फिर जानबूझकर निष्क्रिय बनाई गई है।
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फिर वही कहानी, वही ढर्रा
- दो वर्ष पहले जिस निर्माण को तोड़कर प्रशासन ने सख्ती का संदेश दिया था, उसी स्थान पर दोबारा निर्माण होना यह साबित करता है कि अवैध निर्माणकर्ताओं को कानून का कोई भय नहीं है।
- सवाल यह भी उठता है कि क्या पहले की कार्रवाई केवल दिखावा थी?
ठाणे से नवभारत लाइव के लिए विनोद मिश्रा की रिपोर्ट
