वरली डोम से Eknath Shinde का करप्शन सम्राटों पर तीखा हमला, बोले- जिधर टेंडर, उधर सरेंडर”
BMC Election के रण में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने वरली में हुंकार भरी। उन्होंने उद्धव ठाकरे पर 'मलाई' की राजनीति और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मुंबई के विकास को सुपरफास्ट बनाने का संकल्प दोहराया।
- Written By: अपूर्वा नायक
एकनाश शिंदे (सौ. X )
Eknath Shinde Rally In Worli: मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव के प्रचार अभियान ने अब पूरी रफ्तार पकड़ ली है। वरली डोम में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे और उनके गुट पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार किया।
शिंदे ने महायुति के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा मिशन ‘महाराष्ट्र फास्ट और मुंबई सुपर फास्ट’ विकास है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का एकमात्र एजेंडा हमेशा ‘करप्शन फर्स्ट’ (भ्रष्टाचार प्रथम) रहा है, जिसने मुंबई की प्रगति को वर्षों तक बाधित किया।
मराठी अस्मिता और ‘म’ का असली मतलब
मराठी कार्ड खेलते हुए एकनाथ शिंदे ने विरोधियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को चुनाव नजदीक आते ही अचानक ‘मराठी मानुष’ की याद आने लगती है। शिंदे ने तंज कसते हुए कहा, “इनका ‘म’ सिर्फ मलाई और मतलब के लिए है, जबकि हमारा ‘म’ मराठी और महायुति के लिए समर्पित है।”
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उन्होंने सवाल उठाया कि जो आज मराठी अस्मिता की बात कर रहे हैं, वे जवाब दें कि उनके कार्यकाल में मराठी मानुष को मुंबई छोड़कर अंबरनाथ और बदलापुर जैसी दूरदराज की जगहों पर क्यों विस्थापित होना पड़ा?
नेटफ्लिक्स और ब्रोकर की राजनीति पर प्रहार
- मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों की लंबी सूची गिनाते हुए कहा कि रमाबाई आंबेडकर नगर जैसे महत्वपूर्ण पुनर्विकास प्रोजेक्ट जो पिछले 17 वर्षों से लटके हुए थे, उन्हें महायुति सरकार ने धरातल पर उतारा।
- आदित्य ठाकरे पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “अब दिनभर नेटफ्लिक्स देखने और चुनाव आते ही पॉलिटिक्स करने का जमाना चला गया है।” उन्होंने घोषणा की कि मुंबई में अब ‘स्पीड ब्रेकर’ और दलालों (ब्रोकर्स) की सत्ता खत्म हो चुकी है और अगला महापौर निश्चित रूप से एक मराठी मानुष ही होगा।
भ्रष्टाचार का खुलासा: “जिधर टेंडर, उधर सरेंडर”
मुंबई की तिजोरी लूटने का आरोप लगाते हुए शिंदे ने विपक्षी गुट को ‘करप्शन सम्राट’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इनका सिद्धांत हमेशा ‘जहां टेंडर, वहां सरेंडर’ रहा है।
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मिठी नदी के सफाई कॉन्ट्रैक्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने तंज कसा कि इन्हें काम के समय केवल ‘डिनो मोरिया’ (आदित्य ठाकरे के मित्र) जैसे लोग ही नजर आए। उन्होंने तीखा सवाल पूछा कि इनके ‘किचन कैबिनेट’ में बैठकर फैसले लेने वाला वह रहस्यमयी ‘चंपकलाल’ कौन है, यह अब पूरी मुंबई जान चुकी है।
