Dahisar Bhyander Link Road पर विवाद: 45 हजार मैंग्रोव कटने का आरोप, पर्यावरण बनाम विकास की बहस तेज
Dahisar Bhyander Link Road Project पर विवाद गहराया है। पर्यावरणविदों ने आरोप लगाया कि मार्ग बदलकर मैंग्रोव जंगलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे स्थानीय मछुआरों की आजीविका प्रभावित होगी।
- Written By: अपूर्वा नायक
दहिसर भायंदर लिंक रोड विवाद (सौ. सोशल मीडिया )
Dahisar Bhyander Link Road Mangrove Controversy: मुंबई के उपनगरीय क्षेत्र में प्रस्तावित दहिसर- भाईंदर पश्चिम लिंक रोड परियोजना अब गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है।
पर्यावरणविदों, स्थानीय मछुआरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस परियोजना के तहत सड़क के मूल मार्ग को बदलकर जानबूझकर मैंग्रोव जंगलों और खाड़ी क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, ताकि बड़े बिल्डरों और प्रभावशाली संगठनों की जमीन सुरक्षित रह सके।
प्रकृति बनाम विकास की बहस तेज
यह लिंक रोड मुंबई के पश्चिमी तटीय क्षेत्र को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है। योजना के अनुसार, यह सड़क वर्सोवा से दहिसर पश्चिम कोस्टल रोड होते हुए भाईंदर पश्चिम तक पहुंचेगी, लेकिन आरोप है कि इस परियोजना के लिए करीब 45,000 मैंग्रोव पेड़ों को काटा जाएगा, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान होगा। मैंग्रोव जंगलों को समुद्री तटों की ‘रीढ़’ कहा जाता है। ये जंगल न केवल समुद्री तूफानों और बाढ़ से रक्षा करते हैं, बल्कि कार्बन अवशोषण, ऑक्सीजन उत्पादन और जैव विविधता के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
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दहिसर भायंदर लिंक रोड विवाद (सौ. सोशल मीडिया )
सड़क का बदला गया मार्ग बना विवाद की जड़
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सड़क का मूल लेआउट कुछ प्रभावशाली संस्थाओं और बिल्डरों की जमीन से होकर गुजरता था, लेकिन कथित दबाव और आपत्तियों के बाद मार्ग को बदलकर उसे खाड़ी और मैंग्रोव क्षेत्र से गुजारने का फैसला लिया गया।
सत्यकाम फाउंडेशन के एड कृष्णा गुप्ता का आरोप है कि यह फैसला पर्यावरणीय जरूरतों के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है। हजारों करोड़ के टेंडर और जमीन बचाने का खेल चल रहा है।
Dahisar Bhyander Link Road पर प्रशासन का पक्ष
इस पूरे मामले पर मीरा भाईंदर मनपा के अधिकारी ने स्वीकार किया कि सड़क के डिजाइन में बदलाव डेवलपर्स और कुछ संगठनों की आपत्तियों के बाद किया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय उच्च स्तर पर लिया गया है।
मछुआरों और स्थानीय लोगों की चिंता
चारकोप क्षेत्र के मछुआरे और स्थानीय निवासी इस फैसले से बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि अगर सड़क खाड़ी से होकर गुजरेगी, तोमछलियों का प्राकृतिक आवास खत्म हो जाएगा, मछली पकड़ने का रोजगार प्रभावित होगा, समुद्री जैव विविधता को नुकसान पहुंचेगा। मछुआरे धीरज भंडारी ने कहा कि हमारी आजीविका पहले ही घट चुकी है, अब यह परियोजना हमें पूरी तरह खत्म कर देगी।
बाढ़ और प्रदूषण का खतरा
- विशेषज्ञों के अनुसार, मैग्रोव जंगल पानी को सोखने और बाढ़ के प्रभाव को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि इन्हें हटाया गया, तो मुंबई में बाढ़ की घटनाएं बढ़ सकती है। समुद्री जल का स्तर बढ़ने पर नुकसान ज्यादा होगा। प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ेगा।
- सामाजिक कार्यकर्ता रोहित सुवर्णा ने चिंता जताई दी है। कि मैग्रोव अन्य पेड़ों की तुलना में चार गुना ज्यादा कार्बन अवशोषित करते हैं। इनके खत्म होने से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा।
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नमक उद्योग पर भी संकट
नमक उत्पादन से जुड़े शिलोत्री संघ के अध्यक्ष अशोक पाटिल का कहना है कि पहले ही खाड़ियों में सीवेज का गंदा जल बिना किसी प्रक्रिया के छोड़ा जा रहा है। अब सड़क परियोजना के कारण नमक के खेत भी खत्म हो जाएंगे, छोटे नमक उत्पादकों और पारंपरिक व्यवसायों को नुकसान होगा। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों की मांग है कि इस परियोजना की स्वतंत्र जांच हो, मूल लेआउट को सार्वजनिक किया जाए और पर्यावरणीय प्रभाव का पुनर्मूल्यांकन किया जाए।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए विनोद मिश्रा की रिपोर्ट
