Mira Bhayandar Salt Land Ownership: निजी मालिकाना हक बरकरार, हाई कोर्ट के फैसले से बड़ा झटका केंद्र को
Mira Bhayandar Salt Land Ownership Case: मीरा-भाईंदर की 220 एकड़ नमक भूमि को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार का दावा खारिज कर दिया।
- Written By: अपूर्वा नायक
बॉम्बे हाई कोर्ट (फोटो सोर्स - गूगल इमेज)
Mira Bhayandar Salt Land Ownership Case: मीरा-भाईंदर स्थित 220 एकड़ नमक उत्पादन भूमि को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ा झटका दिया है।
अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यह भूमि निजी स्वामित्व में ही रहेगी और केंद्र का दावा कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखद की पीठ ने 30 अप्रैल को दिए गए अपने निर्णय में कहा कि वर्ष 1870 के समझौते के तहत यह भूमि रामचंद्र लक्ष्मण और उनके उत्तराधिकारियों को 999 वर्षों के पट्टे पर दी गई थी, जिसमें केवल उपयोग का अधिकार ही नहीं बल्कि पूर्ण स्वामित्व भी शामिल था।
नमक उत्पादन के लिए उपयोग में लायी जा रही थी भूमि
केंद्र सरकार ने यह तर्क दिया था कि चूंकि इस भूमि का उपयोग लंबे समय से नमक उत्पादन के लिए किया जा रहा है, इसलिए इसे सरकारी संपत्ति माना जाना चाहिए। साथ ही 1935 के अधिनियम के आधार पर स्वामित्व का दावा भी पेश किया गया था।
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ठाणे की अदालत में खारिज हुए थे सरकार के दावे
हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि विवादित भूमि किसी भी सरकारी सूची में शामिल नहीं थी और केवल नमक उत्पादन के लिए लाइसेंस दिए जाने से स्वामित्व में कोई बदलाव नहीं होता।
अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि केंद्र सरकार ने इस भूमि पर अपना दावा 1983 के बाद प्रस्तुत किया, जबकि उससे पहले लंबे समय तक कोई दावा नहीं किया गया था। इस कारण यह दावा समय सीमा के आधार पर भी स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।
इस मामले में पहले ठाणे की अदालत भी केंद्र सरकार के दावे को खारिज कर चुकी थी, जिसे अब हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है। साथ ही, फैसले पर रोक लगाने की अपील भी अदालत ने अस्वीकार कर दी। इस निर्णय से भाईंदर क्षेत्र में भूमि स्वामित्व विवाद को बड़ी राहत मिली है।
