Bombay High Court में मुस्लिम कोटा विवाद: सरकार बोली- कोई भेदभाव नहीं, याचिका भ्रामक

Bombay HC Verdict On Maharashtra Muslim Reservation Case: महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि मुस्लिमों के लिए 5% आरक्षण 2014 में ही खत्म हो गया था।
Maharashtra Muslim Reservation Case
महाराष्ट्र मुस्लिम रिज़र्वेशन केस (सौ. डिजाइन फोटो )
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Maharashtra Muslim Reservation Case: महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया है कि मुसलमानों को पांच प्रतिशत आरक्षण देने वाला 2014 का अध्यादेश उसी वर्ष समाप्त हो गया था, और इसलिए इस वर्ष फरवरी में जारी किए गए सरकारी आदेश ने समुदाय के लिए किसी भी कोटे को समाप्त नहीं किया है।

राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह अधिवक्ता सैयद एजाज नकवी द्वारा दायर एक याचिका के जवाब में अपना हलफनामा प्रस्तुत किया। याचिका में 17 फरवरी के उस सरकारी आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें कथित तौर पर सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मुस्लिम समुदाय के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण को रद्द कर दिया गया था।

4 मई को याचिका पर सुनवाई

न्यायमूर्ति आर आई छागला और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ द्वारा 4 मई को याचिका पर सुनवाई किए जाने की संभावना है। नकवी ने सरकार के इस फैसले को नस्ली भेदभाव करार दिया था और दावा किया था कि यह संविधान का उल्लंघन है तथा मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ है।

भेदभाव के आरोपों का खंडन

सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग द्वारा दायर हलफनामे में राज्य सरकार के खिलाफ याचिका में लगाए गए नस्ली भेदभाव के आरोपों का खंडन किया गया। सरकार के हलफनामे में कहा गया है कि कोई भेदभाव नहीं किया गया, न ही संविधान के किसी प्रावधान या किसी अन्य कानून का उल्लंघन किया गया है, क्योंकि साविधिक समर्थन के बिना कोई आरक्षण जारी नहीं रह सकता।

इसमें कहा गया कि याचिका भ्रामक है, इसमें कोई दम नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए क्योंकि यह तथ्यों की गलत धारणाओं पर आधारित है तथा 2014 का अध्यादेश समाप्त हो चुका है।

सरकार ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में मुसलमानों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण उपलब्ध कराने हेतु जुलाई 2014 में पारित अध्यादेश उसी वर्ष दिसंबर में समाप्त हो गया और उसके बाद किसी भी वैध कानून द्वारा इसे प्रतिस्थापित नहीं किया गया।

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