Viswanath Amin Suicide Rabies Fear Kalyan (फोटो क्रेडिट-X)
Viswanath Amin Suicide Kalyan East: मुंबई के पास कल्याण इलाके से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक बैंक में वरिष्ठ पद पर कार्यरत युवक ने आवारा कुत्ते के काटने के बाद ‘रेबीज’ (Rabies) होने के खौफ में अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह घटना कल्याण ईस्ट के तिसगांव नाका स्थित सहजीवन सोसायटी की है। मृतक की पहचान एस. विश्वनाथ अमीन के रूप में हुई है। अमीन की आत्महत्या ने न केवल उनके परिवार को सदमे में डाल दिया है, बल्कि शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और उससे जुड़ी मानसिक दहशत पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले एक आवारा कुत्ते ने विश्वनाथ के पैर में काट लिया था। हालांकि उन्होंने तुरंत उपचार कराया और एंटी-रेबीज इंजेक्शन भी लगवाए थे, लेकिन उनके मन में रेबीज होने का डर घर कर गया था। उन्हें लगने लगा था कि उनमें रेबीज के लक्षण विकसित हो रहे हैं और जल्द ही उनकी स्थिति बिगड़ जाएगी। इसी मनोवैज्ञानिक दबाव और परिवार को होने वाली संभावित परेशानी के डर से उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
विश्वनाथ अमीन बैंक में एक जिम्मेदार पद पर थे, लेकिन कुत्ते के काटने की घटना ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया था। बताया जा रहा है कि अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा रेबीज की संभावना जताए जाने के बाद वे गहरे तनाव में चले गए थे। उन्हें डर था कि रेबीज होने के बाद उनकी स्थिति बेहद दर्दनाक हो जाएगी और उनके परिवार को उन्हें इस हाल में देखना पड़ेगा। इसी ‘फोबिया’ और अपनों को तकलीफ से बचाने की चाहत ने उन्हें इतना आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
इस घटना के बाद कल्याण में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी रोष है। शिवसेना (शिंदे गुट) के कल्याण प्रमुख और पूर्व पार्षद महेश गायकवाड़ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर हर्षल गायकवाड़ से मुलाकात की। गायकवाड़ ने मांग की है कि नगर निगम तुरंत इलाके के सभी आवारा कुत्तों का टीकाकरण करे और उनकी नसबंदी की प्रक्रिया तेज करे। उन्होंने प्रशासन को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो नागरिकों का गुस्सा फूट सकता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने में विफल रही है। आए दिन बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्तों के हमले की खबरें आती रहती हैं। महेश गायकवाड़ ने कहा कि विश्वनाथ अमीन जैसे शिक्षित व्यक्ति का इस तरह डर के कारण जान देना सिस्टम की विफलता है। उन्होंने मांग की है कि शहर के हर वार्ड में एंटी-रेबीज दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और कुत्तों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन हो।