14 साल बाद गिरफ्तार हुआ शिवसेना नेता पर हमले का आरोपी, अंबरनाथ में चलीं थीं 20 राउंड गोलियां

Thane News: 2011 अंबरनाथ शिवसेना शाखा हमले का आरोपी 14 साल बाद गिरफ्तार। फायरिंग में शिवसेना नेता अरविंद वालेकर बचे थे, लेकिन अंगरक्षक श्याम सुंदर यादव की मौत हो गई थी।
arrested
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Thane Crime News: 23 नवंबर 2011 की रात को ठाणे जिले के अंबरनाथ स्थित शिवसेना शाखा में हुए जानलेवा हमले के एक आरोपी को ठाणे शहर अपराध शाखा ने 14 साल बाद गिरफ्तार कर लिया है। इस हमले में शिवसेना नेता अरविंद वालेकर बाल-बाल बचे थे, लेकिन उनके एक अंगरक्षक की जान चली गई थी। यह घटना उस समय बेहद सुर्खियों में थी और अब इतने सालों बाद आरोपी की गिरफ्तारी ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा में ला दिया है।

घटना का विवरण

23 नवंबर 2011 की रात करीब 8:30 बजे, अंबरनाथ रेलवे स्टेशन पूर्व परिसर के छत्रपति शिवाजी महाराज चौक पर स्थित शिवसेना शाखा में शिवसेना शहर प्रमुख अरविंद वालेकर बैठे थे। उसी समय, दो अज्ञात हमलावर शाखा के अंदर घुस आए और उन पर रिवॉल्वर से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में वालेकर के अंगरक्षक श्याम सुंदर यादव की मौके पर ही मृत्यु हो गई। हमले के बाद वालेकर के दूसरे अंगरक्षक राकेश यादव ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। शाखा के अंदर कम से कम 20 राउंड गोलियां चली थीं, जिससे पूरा इलाका थर्रा उठा था। इस गोलीबारी में एक हमलावर मनीष कुमार उर्फ बबलू झा शर्मा भी मारा गया था। अंबरनाथ जैसे शहर के खूनी इतिहास को देखते हुए इस घटना ने उस समय सनसनी फैला दी थी।

आरोपी की गिरफ्तारी

इस मामले में पुलिस ने उस समय कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें शिवसेना के ही एक तत्कालीन नगरसेवक पंढरीनाथ वारिंगे भी शामिल थे। हालांकि, हमले का एक मुख्य आरोपी, भैयाजी उर्फ राजेश रामशिरोमणि शुक्ला, घटना के बाद से ही फरार था।

ठाणे शहर अपराध शाखा के केंद्रीय अपराध जांच प्रकोष्ठ को गुप्त सूचना मिली कि यह आरोपी पिछले 14 सालों से अपनी पहचान छिपाकर गुजरात के सूरत शहर में रह रहा है। सूचना के आधार पर, पुलिस टीम ने एक विशेष अभियान चलाकर 51 वर्षीय भैयाजी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद के ग्राम सुकुलपुर का निवासी है।

पुलिस की आगे की कार्रवाई

इस घटना में पहले से ही कुछ आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके थे, जिनमें बाबूसिंह उर्फ नंदलाल शाह, बृजेश हर्ष बहादुर सिंह और प्रदीप जावरेकर शामिल हैं। इस नवीनतम गिरफ्तारी से पुलिस को उम्मीद है कि इस पूरे मामले के पीछे की साजिश और अन्य अनसुलझे पहलुओं का खुलासा हो सकेगा।

इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराध शाखा सालों पुराने मामलों को भी सुलझाने की अपनी क्षमता रखती है। 14 साल बाद हुई इस गिरफ्तारी ने न्याय प्रणाली में लोगों का विश्वास और मजबूत किया है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com