

Ujani AI Data Centre Water Environment: पुणे के उजनी जलाशय परिसर में प्रस्तावित AI कैंपस, डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना के लिए पानी की जरूरत, उपलब्धता और उससे होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग सांसद धैर्यशील राजसिंह मोहिते पाटील ने की है।
उन्होंने 2 अक्टूबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजकर परियोजना की तकनीकी रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की। पत्र के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार, जे. डब्ल्यू. ग्लोबल ग्रुप और द सीड कंसोर्टियम के बीच 16 अप्रैल 2026 को हुए समझौता ज्ञापन के तहत यह परियोजना प्रस्तावित है।
करीब 15 अरब यूरो के निवेश वाली परियोजना के पहले चरण में 680 एकड़ क्षेत्र में 1,400 मेगावाट क्षमता का AI कैंपस व डेटा सेंटर तथा सालाना करीब 6,900 टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन प्रस्तावित है।
मोहिते पाटील ने परियोजना की दैनिक और वार्षिक पानी की जरूरत, जल उपलब्धता, जल बजट, जललेखा परीक्षण तथा सूखे की स्थिति में पानी वितरण के मानदंड स्पष्ट करने को कहा है।
उजनी जलाशय से सोलापुर जिले और लाभक्षेत्र में पेयजल, सिंचाई के साथ खेती, मत्स्य व्यवसाय और अन्य स्थानीय आजीविकाएं जुड़ी हैं। ऐसे में नई परियोजना के लिए पानी उपलब्ध कराने से पहले मौजूदा लाभार्थियों के अधिकार और भविष्य की जल जरूरतों का आकलन करने की मांग की गई है।
डेटा सेंटर की कूलिंग व्यवस्था में कितने पानी का उपयोग होगा, उसका कितना पुनर्वापर किया जाएगा और अपशिष्ट जल का उपचार कैसे होगा, इसकी जानकारी भी मांगी गई है। साथ ही मत्स्य व्यवसाय, जैव विविधता, आर्द्र क्षेत्र, स्थानीय पर्यटन और जलवायु पर संभावित प्रभाव का स्वतंत्र अध्ययन कराने की मांग की गई है।
पत्र में यह भी पूछा गया है कि परियोजना में परमाणु रिएक्टर या स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) शामिल है या नहीं। इसके अलावा 680 एकड़ जमीन, संबंधित गांवों व जमीन मालिकों, प्रभावित नागरिकों के अधिकार और पुनर्वास की स्थिति की जानकारी मांगी गई है।
किसानों, मछुआरों और ग्राम पंचायतों के साथ हुई सलाह-मशविरा प्रक्रिया का विवरण देने को भी कहा गया है। परियोजना से 2,800 से अधिक स्थायी रोजगार मिलने की अपेक्षा के संबंध में पद और कौशल के अनुसार विवरण तथा स्थानीय युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण की योजना भी मांगी गई है।
मोहिते पाटील ने AI कैंपस, डेटा सेंटर, फ्लोटिंग सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन, जलापूर्ति, अपशिष्ट जल प्रबंधन और जमीन उपयोग का संयुक्त तकनीकी, पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव अध्ययन कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा है कि मौजूदा पेयजल और सिंचाई की जरूरतें सुरक्षित होने की पुष्टि के बाद ही अंतिम जल आरक्षण और महत्वपूर्ण मंजूरियों पर निर्णय लिया जाए। पत्र की प्रतियां मुख्य सचिव, जलसंपदा, उद्योग और पर्यावरण विभाग, सोलापुर जिलाधिकारी तथा महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल को भी भेजी गई है।
नवभारत लाइव के लिये समीर सय्यद की रिपोर्ट