

Ambad MIDC Chemical Wastewater: नासिक के अंबड औद्योगिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा रासायनिक सांडपानी की उचित व्यवस्था नहीं किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इसका असर अब सीधे भूजल पर पड़ने की आशंका है।
दत्तनगर क्षेत्र के बोअरवेल से पीले रंग का और रासायनिक मिश्रणयुक्त पानी आने की जानकारी मिलने के बाद महापौर हिमगौरी आडके-आहेर ने गुरुवार को मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला गंभीरता से लेते हुए उन्होंने मनपा के जलापूर्ति विभाग सहित संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक उपाययोजना करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियों द्वारा रासायनिक सांडपानी सीधे नालों में छोड़ा जा रहा है। कुछ स्थानों पर सोख्ता गड्ढे बनाकर उनमें भी सांडपानी डाले जाने की बात सामने आई है। इससे भूजल प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है। आरोप है कि यही दूषित पानी नालों के माध्यम से नंदिनी नदी और आगे गोदावरी नदी में पहुंच रहा है।
महापौर हिमगौरी ने नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो तथा उन्हें सुरक्षित पानी उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। संबंधित अधिकारियों को पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराने तथा आवश्यक उपाययोजना करने को भी कहा गया।
अंबड और सातपुर औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण का मुद्दा नया नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता राजेश पंडित के अनुसार, औद्योगिक सांडपानी पर प्रक्रिया करने के लिए सामूहिक सांडपानी प्रक्रिया केंद्र (CETP) स्थापित करने के निर्देश मुंबई हाईकोर्ट ने वर्ष 2018 में दिए थे। इसके बावजूद यह व्यवस्था अब तक पूरी तरह कार्यान्वित नहीं होने का आरोप उन्होंने लगाया है।
पंडित ने कहा कि औद्योगिक सांडपानी के कारण भूजल तथा नदी-नालों का प्रदूषण हो रहा है तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल और एमआईडीसी को नियमानुसार कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। इस संबंध में उन्होंने विभागीय आयुक्त को पत्र भी दिया है।
इस बीच अंबड एमआईडीसी क्षेत्र के निवासी बोअरवेल में प्रदूषित पानी पाए जाने संबंधी समाचार का महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के नासिक कार्यालय ने गंभीर संज्ञान लिया है। मंडल के अधिकारियों ने क्षेत्र के कुछ प्रदूषणकारी उद्योगों का अचानक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान मे। आरती स्ट्रक्चर्स, एमआईडीसी अंबड की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था ठीक से संचालित नहीं होने तथा आंशिक रूप से प्रक्रिया किया गया सांडपानी उद्योग के बाहर नाले में छोड़े जाने की बात सामने आने का उल्लेख मंडल ने किया है।
इसके बाद संबंधित उद्योग को जल प्रदूषण प्रतिबंध एवं नियंत्रण कानून के तहत निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें मुख्य रूप से उद्योग को बंद क्यों न किया जाए, उद्योग को दी गई सहमति रद्द क्यों न की जाए तथा उद्योग का बिजली और पानी का कनेक्शन क्यों न काटा जाए, इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
औद्योगिक क्षेत्र से सटे रिहायशी इलाकों के बोअरवेल का पानी प्रदूषित होने की घटनाएं सामने आने से नागरिकों के स्वास्थ्य का सवाल गंभीर हो गया है। इसलिए केवल दूषित पानी की समस्या का समाधान करने के बजाय रासायनिक सांडपानी के स्रोत का पता लगाकर जिम्मेदार उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग जोर पकड़ रही है।
निरीक्षण के दौरान सिडको प्रभाग सभापति बालकृष्ण शिरसाठ, नगरसेवक नितीन दातीर, जलापूर्ति एवं मलनिस्सारण विभाग के अधीक्षक अभियंता रविंद्र धारणकर, सातपुर विभागीय अधिकारी नाना सालवे, राजेश पंडित, मनोज साठे, चंदू पाटील, प्रवीण शिलावत, रोशन केदार, रवि वाघ सहित नासिक मनपा अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।