

Irrigation Water Crisis Village For Sale: सोलापुर जिले के तुलशी गांव में एक पोस्टर लगा है जिस पर लिखा है कि 'गांव बिकाऊ है।' ये शब्द उन निवासियों के गुस्से, तंज और गहरी बेचैनी को जाहिर करते हैं जो दशकों से सिंचाई के पानी का इंतजार कर रहे हैं।
सरपंच शरद मोरे ने कहा कि जो कोई भी हमारा गांव खरीदना चाहता है, वह आगे आ सकता है। बाहरी लोगों के लिए यह पोस्टर मजेदार हो सकता है लेकिन यह दिखाता है कि सरकार पिछले 25 सालों से हमें कैसे बेवकूफ बना रही है। तुलशी गांव सीना-माढ़ा लिफ्ट सिंचाई योजना से सिर्फ 9 किलोमीटर दूर है।
यह योजना साल 2000 में शुरू हुई थी लेकिन तुलशी को इसका कोई फायदा नहीं मिला। आसपास के दूसरे गांव ज्यादा पानी वाली नकदी फसलें उगाते हैं, जबकि तुलशी गांव अनिश्चित बारिश का इंतजार करता रहता है।
जिले के रिकॉर्ड के मुताबिक, मादा के कई गांवों में पिछले 45 दिनों से बारिश नहीं हुई है। तुलशी के जलाशयों में पानी बहुत कम या बिल्कुल नहीं है। कुएं और परकोलेशन झीलें सुख चुकी हैं। मोरे कहते है कि हमें जुलाई से ही टैंकरों से पानी मिल रहा है। मानसून के जाने के बाद लगभग 2,700 हेक्टेयर खेती की जमीन बंजर हो सकती है।
हालात इतने खराब हो गए कि ग्रामीणों ने गणेश चतुर्थी के दिन अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें आत्मदाह की चेतावनी दी गई और चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी भी दी गई।
सोलापुर के तुलशी गांव में सिंचाई के पानी की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को राज्य के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के साथ हुई चर्चा के बाद समाप्त कर दिया गया। ग्रामीणों ने लंबे समय से पानी की समस्या को लेकर अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखी थीं।
इस बीच, सोलापुर के जिलाधिकारी एस. कार्तिकेयन ने बताया कि सिंचाई विभाग की ओर से तुलशी गांव का हाइड्रोलॉजिकल सर्वे पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर क्षेत्र में नहर नेटवर्क विकसित करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। प्रस्ताव के बाद आगे की प्रक्रिया और आवश्यक निर्णय सरकार के स्तर पर लिए जाएंगे।