

Maharashtra Fisheries & Ports Development Minister Nitesh Rane News: महाराष्ट्र में इस साल सामान्य से कम बारिश होने के कारण राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने 26 सिंतबर को राज्य की 265 तालुकाओं में सूखा घोषित किया था। इस विकट स्थिति की लगातार समीक्षा करने, प्रभावित लोगों को त्वरित राहत पहुंचाने और आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए गठित उच्चस्तरीय 'कैबिनेट सब-कमेटी' बनाई गई थी। अब इसमें एक अहम बदलाव किया गया है। महाराष्ट्र सरकार ने मत्स्य पालन और बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे को इस सब-कमेटी में सदस्य के तौर पर आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया है।
महाराष्ट्र सरकार के आपदा प्रबंधन, राहत और पुनर्वास विभाग ने इस संबंध में 29 सितंबर को एक आधिकारिक सरकारी आदेश (GR) जारी किया।
29 सितंबर को आयोजित राज्य कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता वाली इस 11-सदस्यीय कैबिनेट सब-कमेटी में मंत्री नितेश राणे को शामिल करने की स्वीकृति दी गई। इस नए फैसले के साथ ही अब राज्य में सूखे की समीक्षा के दायरे को और व्यापक बना दिया गया है। अब सूखा राहत कार्यों में कृषि और पेयजल के साथ-साथ मत्स्य पालन और तटीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र को पहले ही कृषि का दर्जा दे रखा है। कम बारिश का असर न केवल पारंपरिक किसानों पर पड़ता है, बल्कि जलाशय, नदियों और तटीय क्षेत्रों में मछली पालन और व्यवसाय से जुड़े लाखों मछुआरों और उत्पादकों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलता है।
कैबिनेट सब-कमेटी में नितेश राणे के शामिल होने से अब जल निकायों के सूखने या पानी के घटते स्तर से प्रभावित होने वाले मछुआरों की समस्याओं को भी सीधे राहत पैकेज और सरकारी योजनाओं के तहत कवर किया जाएगा।
मत्स्य पालन और बंदरगाह विकास मंत्री के तौर पर नितेश राणे अब सूखे से प्रभावित तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को समय पर सहायता, मुआवजा और ढांचागत सुधार प्रदान करने की निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेंगे।
इस 11-सदस्यीय कैबिनेट सब-कमेटी की मुख्य जिम्मेदारी राज्य में मानसून की स्थिति, जलाशयों में पानी का भंडारण, पेयजल संकट और फसलों के नुकसान की समय-समय पर गहन समीक्षा करना है। कमेटी सूखे से निपटने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक सुधार के उपाय सुझाएगी तथा संकट की इस घड़ी में राहत सामग्री और आर्थिक सहायता के वितरण पर पैनी नजर रखेगी।