आईटी पार्क में ट्रैफिक कंट्रोल के लिए स्मार्ट सिग्नल सिस्टम, आईटी इंजीनियर ने किया ईजाद, यहां लगा पहला सिग्नल
- Written By: संतोष मिश्रा
पिंपरी: आईटी पार्क (IT Park) के रूप में पहचाने जाने वाले हिंजवड़ी (Hinjewadi) में वाहनों की संख्या बढ़ रही हैं। अपर्याप्त सड़कों और लाखों वाहनों के कारण, आईटी शहर में कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में कई घंटे लग रहे हैं। इसे समस्या को दूर करने के लिए एक आईटी इंजीनियर ने स्मार्ट सिग्नल सिस्टम शुरू किया है। पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस (Pimpri-Chinchwad Police) की मदद से विनोद वस्ती में प्रायोगिक तौर पर लगाए गए पहले स्मार्ट सिग्नल (Smart Signal) से यात्रियों को लगने वाले समय में कमी आई है। स्मार्ट सिग्नल का समय स्वचालित रूप से सेट हो जाता है। जब तक सभी वाहन गुजर नहीं जाते, तब तक सिग्नल हरा रहता है। यदि एक ही समय में चारों तरफ से वाहनों की संख्या बढ़ जाती है, तो ट्रैफिक चलता रहता है।
आईटी इंजीनियर प्रदीप गिलबिले की डाटा मॉर्फोसिस टेक्नोलॉजी नाम से अपनी खुद की कंपनी है। प्रदीप रावेत में रह रहे हैं और उनका कार्यालय हिंजवड़ी में है। ट्रैफिक जाम के कारण घर से ऑफिस आने-जाने में काफी समय बर्बाद होता है। उन्होंने सोचा कि क्या इसका कोई समाधान निकाला जा सकता है।
इन स्थानों पर लगता है भारी ट्रैफिक जाम
हिंजवड़ी इलाके में विप्रो कंपनी चौक, शिवाजी चौक, लक्ष्मी चौक, मेजा 9 चौक, विनोदे नगर, काला खड़क, भूमकर चौक, कास्पते बस्ती जैसे आठ से दस स्थानों पर भारी ट्रैफिक जाम रहता है। इसका रास्ता निकालने के लिए गिलबिले ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रियल टाइम डेटाबेस के आधार पर शोध किया और एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम तैयार किया।
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विनोदे बस्ती के चौराहे पर स्मार्ट सिग्नल सिस्टम लागू
पिंपरी-चिंचवड़ शहर में स्मार्ट सिटी के तहत सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम चल रहा है। उसी दौरान, गिलबिले ने तत्कालीन पुलिस उपायुक्त आनंद भोइटे को प्रस्ताव दिया कि यदि स्मार्ट सिग्नल के लिए एक प्रणाली लागू की जाती है, तो इससे यातायात की भीड़ को हल करने में बहुत लाभ हो सकता है। पुलिस उपायुक्त भोईटे को स्मार्ट सिग्नल का प्रस्ताव पसंद आया। उन्होंने वाकड यातायात विभाग के पुलिस निरीक्षक सुनील पिंजन को इसका समन्वय करने का निर्देश दिया। एक साल के काम के बाद अप्रैल 2023 में तैयारी पूरी की गई और पायलट आधार पर विनोदे बस्ती के चौराहे पर स्मार्ट सिग्नल सिस्टम लागू किया गया।
स्मार्ट सिग्नल के लिए इतने रुपए की लागत अनुमानित
सिग्नल के चारों ओर कितने वाहन हैं। किस दिशा में अधिक वाहन हैं। सिग्नल पास करने में वाहन को कितना समय लगता है? ऐसे सभी कारकों पर विचार करते हुए स्मार्ट सिग्नल का समय स्वचालित रूप से सेट हो जाता है। जब तक सभी वाहन गुजर नहीं जाते, तब तक सिग्नल हरा रहता है। यदि एक ही समय में चारों तरफ से वाहनों की संख्या बढ़ जाती है, तो ट्रैफिक चलता रहेगा, सिग्नल की टाइमिंग इस तरह सेट की जाती है। स्मार्ट सिग्नल के लिए कंट्रोलर, सर्वर, कैमरा, सॉफ्टवेयर आदि की जरूरत है। एक चौक में स्मार्ट सिग्नल के लिए 10 से 12 लाख रुपये की लागत अनुमानित हैं
ग्रीन कॉरिडोर की सुविधा
जैसे ही सिग्नल पर लगे कैमरे के फेज में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड का आवाज आता है, उन वाहनों को डायवर्ट कर दिया जाता है। जैसे ही ये वाहन गुजरते हैं, वाहनों की संख्या के अनुसार सिग्नल सिस्टम रीसेट हो जाता है। वर्तमान में महत्वपूर्ण व्यक्तियों का काफिला गुजरने पर करीब 15 से 20 मिनट तक यातायात बाधित रहता है। इससे हर तरफ से वाहनों की भारी भीड़ रहती है। इसका जवाब स्मार्ट सिग्नल सिस्टम में मिल गया है। जैसे ही सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति का काफिला पिछले दो सिग्नल दिखाई देता है, उसके आगे दो सिग्नल ही ट्रैफिक रोक दिया जाता है।
समय कम होने से जाम नहीं लग रहा
इसमें लगभग एक से दो मिनट का समय लगता है। समय कम होने से जाम नहीं लग रहा है। इस स्मार्ट सिग्नल के जरिए सिग्नल तोड़ना, हेलमेट नहीं लगाना, सीट बेल्ट नहीं लगाना जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। उल्लंघन करने वाले चालकों की अच्छी गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने और उन्हें संबंधित प्रणाली के माध्यम से वाहन मालिक को भेजने के लिए सिस्टम भी स्वचालित है। इसलिए ट्रैफिक पुलिस ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों से बहस करने में अपना समय बर्बाद नहीं करेगी।
शातिर बदमाशों पर भी कसेगा शिकंजा
पुलिस द्वारा तड़ीपार किए बदमाश कई बार शहर में खुलेआम घूमते पाए जाते हैं। कई बार पुनः वारदातें करते हैं। पुलिस कई अपराधियों को पकड़ने में नाकाम रहती है। ऐसे में स्मार्ट सिग्नल सिस्टम पुलिस के काम आ सकता हैं। इस सिस्टम में फेस आइडेंटिफिकेशन की सुविधा दी जा सकती है। लिहाजा सॉफ्टवेयर के आधार पर सिग्नल पर आए व्यक्ति की पहचान करना आसान हो जाता है। यदि वांछित, फरार और तड़ीपार अभियुक्तों की सूचना साफ्टवेयर में रखी जाती है तो मैचिंग सूचना मिलते ही सिग्नल से सीधे पुलिस को फोटो सहित सूचना प्राप्त करने की व्यवस्था की जा सकती है। इसके साथ ही अक्सर चौक में हादसे के बाद गलती किसकी है इसे लेकर विवाद बढ़ जाता है। हादसे की जानकारी मिलने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक की प्रक्रिया में स्मार्ट सिग्नल काम आएगा। यदि सिग्नल पर लगे सीसीटीवी के दायरे में कोई दुर्घटना होती है तो तत्काल उसकी फोटो लेकर उस सिग्नल पर तैनात पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन पर सूचना और फोटो भेजने की व्यवस्था है। यदि किसी सिग्नल पर पुलिस नहीं है, तो यह जानकारी निकटतम यातायात विभाग, पुलिस स्टेशन के साथ भी साझा की जा सकती है। इससे पुलिस के लिए स्थिति को संभालना और भी आसान हो जाता है।
