मराठी के अपमान पर भड़की प्रियंका चतुर्वेदी, बोलीं- जिस थाली ने खाना दिया हो...

Maharashtra News: मराठी के अपमान पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि अब अपमान बर्दाश नहीं होगा। महाराष्ट्र पर अब कोई अन्याय न कर सके इसलिए ठाकरे भाई साथ आए है।
शिवसेना यूबीटी सांसद प्रियंका चतुर्वेदी (pic credit; social media)
शिवसेना यूबीटी सांसद प्रियंका चतुर्वेदी (pic credit; social media)
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मुंबई: 20 साल बाद एक मंच पर दो ठाकरे भाई एक साथ दिखे। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की संयुक्त रैली से कई नेता खुश है। ठाकरे बंधुओं की संयुक्त रैली पर शिवसेना यूबीटी की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि ये बहुत बड़ा ऐतिहासिक क्षण है। तो वही शिवसेना यूबीटी के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि ये बहुत आनंद का क्षण है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में कहा, कि मुझे इस बात की खुशी है कि मैं इस ऐतिहासिक क्षण में शामिल हुई हूं। दोनों भाइयों का एक मंच पर होना महाराष्ट्र के लोगों के दिल में था। आज जो दोनों भाई साथ में आए हैं यही उम्मीद है कि समय की मांग समझकर, जनता की उम्मीद समझकर वो एक साथ आगे बढ़ेंगे और महाराष्ट्र का हित हमेशा आगे रखेंगे।

जिस थाली ने खाना दिया हो उसे अपमानित करने पर आवाज उठेगी

मराठी भाषा पर ठाकरे बंधुओं के भाषण पर उन्होंने कहा, जिस महाराष्ट्र ने आपकी थाली में भोजन दिया हो, जिस महाराष्ट्र ने आपकी जेब में पैसे दिए हों, जिस महाराष्ट्र ने आपको नौकरी और रोजगार के माध्यम बनाकर दिए हों, मेरे खुद के माता-पिता उत्तर भारत से आए पर आज मुझे गर्व है कि मैं महाराष्ट्र में पली-बढ़ी हूं और महाराष्ट्र के हित को आगे रखने में हूं। जो आपको थाली में खाना देता है उसी को आप अपमानित करेंगे तो आवाज उठेगी।

अरविंद सावंत ने कहा- इस क्षण का कबसे इंतजार था

वहीं, शिवसेना यूबीटी के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि ये बहुत आनंद का क्षण है। इसी का तो इंतजार था। हम भाग्यवान रहे कि इसके साक्षी रहे। पूरा महाराष्ट्र इसका इंतजार कर रहा था। जब मराठी के ऊपर अन्याय हुआ तो आज दिखा कि पानी कैसे इकट्ठा हुआ। महाराष्ट्र के ऊपर अगर कोई अन्याय करे तो उसका प्रतिकार करना ही है। उसी प्रतिकार के लिए दोनों भाई इकट्ठे आए हैं। इसकी हमें खुशी है।

बीजेपी पर साधा निशाना

बीजेपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पूरे देश में विभाजनकारी विचार रखने वाली पार्टी परिवार को भी तोड़ देते हैं। हमें सीधा एक बनकर इसका सामना करना है।

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