नवी मुंबई के टाटा कैंसर अस्पताल के पीछे हो रहा अवैध खनन (सोर्स: सोशल मीडिया)
Illegal Mining Navi Mumbai: नवी मुंबई के खारघर स्थित टाटा कैंसर अस्पताल के पीछे कथित अवैध पत्थर खनन और क्रशिंग गतिविधियों के मामले में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने संयुक्त निरीक्षण का आदेश दिया है। अधिकरण ने उत्खनन की वास्तविक मात्रा, अनुमति की स्थिति और अस्पताल को संभावित नुकसान की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। नेट कनेक्ट फाउंडेशन के निदेशक बीएन कुमार की याचिका और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर लिए गए स्वतः संज्ञान मामले की 12 फरवरी को सुनवाई करते हुए पश्चिमी क्षेत्रीय पीठ ने 4 सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की गई समिति को स्थल का निरीक्षण कर एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. सुजीत कुमार बाजपेयी की पीठ ने निर्देश दिया कि समिति में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रायगड़ जिलाधिकारी, भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल होंगे। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल को समन्वय के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।
समिति को यह जांचने को कहा गया है कि क्या वर्तमान में या पूर्व में खनन और क्रशिंग गतिविधियां बिना आवश्यक अनुमति के संचालित की गयी और वे कितने समय तक चली और कुल कितना उत्खनन हुआ। साथ ही, अस्पताल की इमारत, मरीजों और संवेदनशील चिकित्सा उपकरणों पर इन गतिविधियों के प्रभाव का आकलन कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुझाने के निर्देश दिए गए हैं।
रायगड़ जिलाधिकारी द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया कि खनन की अनुमति केवल वितीय वर्ष 2020-21 तक थी और उसके बाद कोई नई अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, 6 क्रशर मशीनों के संचालन की बात स्वीकार की गई, जिन्हें महाराष्ट्र नियंत्रण बोर्ड से ‘कन्सेंट टू ऑपरेट’ तथा पूर्व ग्राम पंचायत ओवे से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त है।
यदि जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि अब तक किए गए उत्खनन की सटीक मात्रा निर्धारित नहीं की जा सकती है और इसके लिए इटीएस सर्वेक्षण आवश्यक होगा। अधिकरण ने सर्वेक्षण कर उत्खनन की मात्रा तथा अतिरिक्त खनन हुआ हो, तो उसका विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने हलफनामे में क्रशर इकाइयों को शर्तों सहित अनुमति देने की बात कही, साथ ही जल और वायु अधिनियमों के तहत कुछ इकाइयों को अनुपालन न करने पर प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी भी दी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि लगातार ब्लास्टिंग और कंपन से कैंसर अस्पताल की संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचा है। देशभर से आने वाले कैंसर मरीजों का इलाज करने वाली इस महत्वपूर्ण संस्था के गतिविधियों को लेकर स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण समूहों ने चिंता जताई है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित है और संयुक्त समिति की रिपोर्ट इस प्रकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।