बैलों की मौत (सौजन्य-नवभारत)
Karanja Ghadge Accident: वर्धा जिले के कारंजा घाडगे तहसील के पार्डी गांव में एक दर्दनाक घटना घटी। खेत की ओर बैलगाड़ी से जा रहे किसान पर झाड़ियों में छिपे बाघ ने अचानक हमला करने का प्रयास किया। बाघ को हमला करते देख बैलगाड़ी में जुते दोनों बैल बूरी तरह बिदक गए और जान बचाने के लिए तेज रफ्तार से भागे।
कुछ दूरी पर गहरी खाई में गिरकर रस्सियों के फंदे में उलझ जाने से दोनों बैलों की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना बुधवार, 18 फरवरी की दोपहर लगभग 3 बजे की बताई गई। पार्डी निवासी किसान किसना डोमाजी मरस्कोले (70) अपने बेटे के साथ मालरान स्थित खेत में बैलगाड़ी से जा रहे थे। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाए बैठे बाघ ने बैलों पर झपट्टा मारने की कोशिश की।
घबराए बैल अनियंत्रित होकर दौड़ पड़े, जिससे किसान गाड़ी से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उनका पुत्र सुरक्षित बच गया। किसान ने घायल अवस्था में भी अपने प्रिय बैलों की तलाश की। जब उन्होंने खाई में फंदे से लटके मृत बैलों को देखा तो फूट-फूटकर रो पड़े।
ग्रामीणों के अनुसार किसान को अपनी बैल जोड़ी से बेहद लगाव था। घटना की सूचना पूर्व सरपंच दीपाली कवारे के पति मंगेश कवारे और पुलिस पाटिल अरविंद चाफले ने वन विभाग और राजस्व विभाग को दी। घायल किसान को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
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ग्रामीणों का कहना है कि आष्टी से कारंजा (घा.) मार्ग पर रात में सीमेंट सड़क निर्माण कार्य के कारण तेज आवाज और आवाजाही बढ़ गई है, जिससे वन्य जीवों के प्राकृतिक मार्ग बाधित हो रहे हैं। पानी की तलाश में आने-जाने वाले रास्तों में रुकावट के कारण बाघ और भालू जैसे वन्य प्राणी अब गांव और खेतों की ओर रुख कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि मानव-वन्य जीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। बावजुद इसके वन विभाग ठोस उपाय योजना नहीं कर रहा है। बैलों की मृत्यु से किसान का भारी नुकसान हुआ है। किसानों ने शासन से उचित मुआवजे और क्षेत्र में वन्य जीवों के नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।