गर्मी का असर: पानशेत-सिंहगड़ में जलस्रोत सूखे, भोजन संकट गहराया; वन्यजीव गांवों की ओर
Pune Forest Wildlife: पानशेत-सिंहगड़ क्षेत्र में जलस्रोत सूखने से वन्यजीव गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। आंबी गांव में दो चित्तल हिरण पिछले दो दिनों से खेतों में देखे जा रहे हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
Deer Enter Residential Areas ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Deer Enter Residential Areas: पुणे वेल्हे तहसील के पानशेत-सिंहगड़ क्षेत्र में गर्मी की तीव्रता बढ़ने के कारण जंगलों के प्राकृतिक जलस्रोत, नाले और झरने पूरी तरह सूख गए हैं। घास और चारा सूख जाने से वन्यजीवों के सामने भोजन का भी संकट खड़ा हो गया है।
इसी के परिणामस्वरूप, सिंहगड और पानशेत के जंगलों में रहने वाले हिरण, भेकर, खरगोश और जंगली सूअर जैसे जानवर, साथ ही मोर और लांडोर जैसे पक्षी पानी और भोजन की तलाश में अब रिहायशी इलाकों और खेतों की ओर रुख कर रहे हैं।
पानशेत के पास स्थित आंबी (तहसील हवेली) गांव में पिछले दो दिनों से चित्तल प्रजाति के दो हिरण खुलेआम घूमते देखे जा रहे हैं। स्थानीय किसानों के अनुसार, ये हिरण शाम ढलते ही गांव के पास शंकरराव दौलती निवंगुणे के खेत में आ जाते हैं और पूरी रात वहीं बिताते हैं।
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सुबह उजाला होने से पहले ही वे वापस जंगल की दिशा में लौट जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि ये हिरण किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं, जिससे गांव में कौतूहल का विषय बना हुआ है।
आधी गाय के निकट रूले और कादवें क्षेत्र में घना वनक्षेत्र है, जहां वन्यजीवों का प्राकृतिक निवास है, प्यास के कारण जानवर कुछ समय के लिए बाहर आते हैं और फिर वापस लौट जाते हैं। इन्हें पकड़कर कहीं और छोड़ना व्यावहारिक समाधान नहीं है। वन विभाग स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है और आवश्यक उपाय किए जा रहे है।
– सिंहगड वन विभाग, परिक्षेत्र अधिकारी, समाधान पाटिल
कृत्रिम जलस्रोतों की मांग
वन्यजीवों के आबादी क्षेत्र में आने से ग्रामीण जहां उत्साहित हैं, वहीं सुरक्षा को लेकर चिंतित भी हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि शाकाहारी जानवर गांव की ओर आ रहे हैं, तो उनके पीछे शिकारी जानवरों के आने की संभावना भी बढ़ जाती है।
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जिला कांग्रेस के कार्याध्यक्ष लहूअण्णा निवंगुणे ने मांग की है कि वन विभाग को जंगल के भीतर कृत्रिम जलकुंड बनाने चाहिए और टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि वन्यजीव गांव की ओर न आएं।
