59 साल में पहली बार शरद पवार बारामती में नहीं कर सके मतदान, सुप्रिया सुले ने बताया क्यों हुआ ऐसा?
Sharad Pawar Baramati Voting: शरद पवार 59 साल में पहली बार बारामती में नहीं कर सके मतदान। सुप्रिया सुले ने बताया- पोस्टल वोटिंग का समय निकलने से हुई चूक।
- Written By: अनिल सिंह
Sharad Pawar Baramati Voting (फोटो क्रेडिट-X)
Sharad Pawar Baramati Bypoll: महाराष्ट्र की राजनीति के ‘भीष्म पितामह’ कहे जाने वाले शरद पवार के संसदीय और राजनीतिक जीवन में आज एक ऐसा पल आया, जिसने इतिहास बदल दिया। पिछले 59 वर्षों में यह पहली बार हुआ है कि शरद पवार अपने पैतृक गढ़ बारामती में मतदान नहीं कर सके। आज, 23 अप्रैल 2026 को बारामती विधानसभा उपचुनाव के लिए वोट डाले जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती होने के चलते पवार अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित रह गए।
बारामती की यह सीट अजित पवार के असामयिक निधन के बाद खाली हुई थी, जहाँ से उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार चुनावी मैदान में हैं। मतदान के दिन जहाँ सुनेत्रा पवार, सुप्रिया सुले और परिवार के अन्य सदस्यों ने मतदान केंद्र पहुंचकर वोट डाला, वहीं शरद पवार की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। खुद शरद पवार ने 21 अप्रैल को एक भावुक ट्वीट कर इस पर खेद जताया था कि अस्पताल में होने के कारण वह इस बार मतदान नहीं कर पाएंगे।
मी १९६७ मध्ये लढविलेल्या पहिल्या निवडणुकीपासून बारामती मतदारसंघातील माझ्या मतदानाचा हक्क अखंडपणे बजावला. आता २०२६ मध्ये बारामती विधानसभा मतदारसंघात महाराष्ट्राचे एक लाडके व लोकप्रिय नेते स्व. अजित पवार यांच्या दुर्दैवी, अपघाती निधनाच्या शोकात्म पार्श्वभूमीवर ही पोटनिवडणुक होत… — Sharad Pawar (@PawarSpeaks) April 21, 2026
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क्यों नहीं चुनी पोस्टल वोटिंग की सुविधा?
मतदान के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए सांसद सुप्रिया सुले ने इस पूरे घटनाक्रम पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि शरद पवार हमेशा से ही मतदान केंद्र पर जाकर व्यक्तिगत रूप से वोट डालने के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने लोकतंत्र के प्रति अपने सम्मान के चलते पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) के विकल्प को स्वेच्छा से नहीं चुना था, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि वे मतदान के दिन तक स्वस्थ होकर बारामती पहुंच जाएंगे।
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डॉक्टरों की मनाही और समय का फेर
सुप्रिया सुले के अनुसार, ऐन वक्त पर डॉक्टरों ने शरद पवार की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें यात्रा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जब परिवार और स्वयं पवार ने पोस्टल वोटिंग के विकल्प पर विचार किया, तब तक आवेदन करने की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी। चुनाव नियमों के अनुसार, पोस्टल वोटिंग के लिए मतदान से कुछ दिन पहले ही प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसी तकनीकी कारण और डॉक्टरी सलाह की वजह से 59 साल में पहली बार शरद पवार का नाम ‘मतदाताओं’ की सूची में होने के बावजूद उनके नाम के आगे स्याही नहीं लग सकी।
VIDEO | Baramati Bypoll 2026: After casting vote, NCP (SP) MP Supriya Sule, says, “We have come here to vote. In a strong democracy, it is both the right and the responsibility of every citizen to vote. That is why we have all come here to cast our votes.” ” (Sharad) Pawar Sahab… pic.twitter.com/tELwNAtZJF — Press Trust of India (@PTI_News) April 23, 2026
बारामती में चुनावी माहौल
अजित पवार के निधन के बाद हो रहे इस उपचुनाव में बारामती की जनता काफी भावुक नजर आ रही है। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं। सुप्रिया सुले ने कहा कि भले ही उनके पिता आज शारीरिक रूप से वहां मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनका आशीर्वाद और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा हमेशा उनके साथ है।
