'शिवाजी कोण होता?' किताब पर भड़के विधायक संजय गायकवाड़; प्रकाशक को दी गाली, ऑडियो क्लिप वायरल

Sanjay Gaikwad Controversy: शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने 'शिवाजी कोण होता?' (शिवाजी कौन थे?) किताब के प्रकाशक को दी गाली। संजय गायकवाड़ का ऑडियो क्लिप वायरल हुआ है।
Sanjay Gaikwad Abuse Audio Clip Viral
Sanjay Gaikwad Abuse Audio Clip Viral (फोटो क्रेडिट-X)
Published on
Updated on

Sanjay Gaikwad Abuse Audio Clip Viral: महाराष्ट्र की राजनीति में अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए जाने जाने वाले शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार विवाद की वजह दिवंगत कॉमरेड गोविंद पानसरे द्वारा लिखित प्रसिद्ध किताब 'शिवाजी कोण होता?' (शिवाजी कौन थे?) बनी है। इस किताब के शीर्षक और उसमें छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्रण को लेकर गायकवाड़ ने प्रकाशक प्रशांत अम्बी को फोन पर न केवल कड़ी फटकार लगाई, बल्कि अपशब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें धमकी भी दी। इस बातचीत का एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

विधायक संजय गायकवाड़ ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि वायरल ऑडियो क्लिप उन्हीं की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किताब का शीर्षक और उसके भीतर महाराज का बार-बार अलग-अलग संदर्भों में उल्लेख करना उन्हें अपमानजनक लगा। गायकवाड़ के अनुसार, उनके परिवार को यह किताब एक कार्यक्रम में भेंट की गई थी, जिसे पढ़ने के बाद उन्होंने प्रकाशक से संपर्क किया।

"भाई की तरह समझाया, फिर दी गाली"

अपने स्पष्टीकरण में संजय गायकवाड़ ने कहा, "मैंने पहले उन्हें (प्रकाशक को) भाई की तरह समझाने की कोशिश की थी। मैंने पूछा कि आपने ऐसी किताब क्यों प्रकाशित की जिसमें महाराज का उचित सम्मान नहीं दिख रहा और इतिहास को अनोखे ढंग से पेश किया गया है? जब उन्होंने बहाने बनाने शुरू किए और जाति का हवाला दिया, तब मेरा गुस्सा फूट पड़ा। महाराष्ट्र में आराध्य देव का अपमान हम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।"

किताब की सामग्री पर आपत्ति

गायकवाड़ का आरोप है कि किताब के हर पृष्ठ पर शिवाजी महाराज के अस्तित्व और उनकी पहचान (मराठा, क्षत्रिय आदि) को लेकर अलग-अलग तर्क दिए गए हैं, जो भ्रम पैदा करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि बार-बार महाराष्ट्र में महापुरुषों का अपमान क्यों किया जा रहा है? विधायक ने यह भी दावा किया कि सोशल मीडिया पर जो क्लिप वायरल हुई है, वह विकृत है और उसमें से उनके कुछ तार्किक शब्द हटा दिए गए हैं ताकि उन्हें गलत दिखाया जा सके।

इतिहास और अभिव्यक्ति पर छिड़ी बहस

इस घटना के बाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और महापुरुषों के इतिहास के प्रति संवेदनशीलता के बीच बहस छिड़ गई है। गोविंद पानसरे की यह किताब दशकों से वैचारिक हलकों में पढ़ी जाती रही है, लेकिन संजय गायकवाड़ के कड़े रुख ने इसे एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। फिलहाल, प्रकाशक की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने की जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर गायकवाड़ के इस 'आक्रामक' अंदाज पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com