Purandar Airport मुआवजा तय करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में, 50 हेक्टेयर जमीन बाकी

Purandar International Airport के लिए भूमि अधिग्रहण रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी गई। किसानों के मुआवजे और पुनर्वास पैकेज पर जल्द निर्णय अपेक्षित है। किसानों को अभी भी 50 प्रश भूमि अधिग्रहित नहीं हुई।
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पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (सौ. सोशल मीडिया )
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Purandar International Airport News: पुरंदर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित जमीन की माप और मुआवजे की रकम की विस्तृत रिपोर्ट मंगलवार 11 नवंबर को राज्य सरकार को भेज दी गई।

इस रिपोर्ट को मंजूरी मिलने के बाद जिला प्रशासन की ओर से जमीन के मुआवजे की राशि तय की जाएगी और उसके वितरण का पैमाना निश्चित किया जाएगा।

माना जा रहा है कि इस महीने के आखिर तक किसानों को मिलने वाले मुआवजे की रकम तय हो जाएगी। यह जानकारी जिलाधिकारी जितेंद्र डूडी ने दी है।

50 हेक्टेयर जमीन अब तक अधिग्रहित नहीं

डूडी ने बताया कि इस भूमि अधिग्रहण पर लगभग पांच हजार करोड़ रुपए का खर्च अपेक्षित है। इसके तहत सात गांवों की लगभग 1,285 हेक्टर (करीब तीन हजार एकड़) जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इनमें से लगभग 3 से 4 प्रतिशत (करीब 50 हेक्टेयर) जमीन अब तक अधिग्रहित नहीं हो पाई है।

240 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन देंगे किसान

उन्होंने बताया कि नक्शे के बाहर की लगभग 240 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन देने के लिए किसानों ने सहमति जताई है। उस जमीन की माप का काम पूरा कर लिया गया है। रिपोर्ट तैयार करने में निर्धारित समय से एक सप्ताह अधिक लगा है क्योंकि इस रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक किसान को उसकी जमीन, पेड़, कुएं, पाइपलाइन आदि के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। इसलिए यह रिपोर्ट बेहद सावधानी से तैयार की गई है।

पुनर्वास पैकेज में वृद्धि की मांग

  • अब यह प्रस्ताव महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (MIDC) अधिनियम की कलम 32(1) के तहत राज्य सरकार को भेजा गया है। डूडी ने बताया कि इस प्रस्ताव को राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अगले दो सप्ताह में धारा 32(3) के अनुसार किसानों के मुआवजे की गणना पूरी कर ली जाएगी।
  • इस बीच किसानों ने मुआवजे की रकम और पुनर्वास पैकेज में वृद्धि की मांग की है। "इस विषय पर हम राज्य सरकार से चर्चा करेंगे। एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित की जा रही 1,285 हेक्टेयर जमीन में से लगभग 50 हेक्टेयर भूमि अभी तक जमीन मालिकों ने देने की मंजूरी नहीं दी है। लेकिन किसानों ने नक्शे के बाहर की 240 हेक्टेयर अति रिक्त जमीन देने की इच्छा जताई है। जिसकी माप का कार्य भी पूरा हो चुका है।
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