पुणे में जल संकट: 948 करोड़ रुपये के बकाया टैक्स के कारण मंगलवार से बंद हो सकती है शहर की पानी सप्लाई
Pune News: पुणे मनपा पर जल संसाधन विभाग का 948 करोड़ रुपये बकाया है। भुगतान न होने पर 24 मार्च से जलापूर्ति रोकने की चेतावनी दी गई है, जिसके बाद आयुक्त ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
- Written By: रूपम सिंह
Pune Water Crisis (Image- Social Media)
Pune Water Crisis News: पुणे शहर में हर साल गर्मियों में पानी बिल (वॉटर चार्ज) को लेकर पुणे मनपा और महाराष्ट्र जल संसाधन विभाग के बीच विवाद देखने को मिलता है। इस बार यह विवाद और गंभीर हो गया है। जल संसाधन विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि बकाया 948 करोड़ रुपए का वाटर टैक्स सोमवार 23 मार्च तक जमा नहीं किया गया तो मंगलवार 24 मार्च से पुणे शहर की जलापूर्ति बंद कर दी जाएगी।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए महानगरपालिका आयुक्त नवल किशोर राम ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हस्तक्षेप की मांग की है। आयुक्त के अनुसार मुख्यमंत्री की ओर से इस मामले में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और जल्द रास्ता निकालने के लिए पुणे महानगरपालिका और जल संसाधन विभाग की बैठक होगी। जल संसाधन विभाग के अनुसार पुणे शहर को खड़कवासला डैम श्रृंखला से हर साल 11.60 टीएमसी पानी का कोटा मंजूर है।
दंड के साथ अतिरिक्त शुल्क
महाराष्ट्र जल संपत्ति नियमन प्राधिकरण के नियमों के अनुसार तय सीमा से अधिक पानी उपयोग करने पर दंड के साथ अत्तिरिक्त शुल्क वसूला जाता है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पानी उपयोग और जुर्माने को मिलाकर मनपा को हर साल करीब 300 करोड़ रुपये जल संसाधन विभाग को देना होता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से पूरी राशि जमा नहीं की गई, जिससे बकाया बढ़कर 948 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023-24 में मनपा ने 201.78 करोड़ रुपये और 2024-25 में 232.09 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।
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पुणे मनपा ने किया 411 करोड़ रुपये देने का दावा
पुणे मनपा आयुक्त नवल किशोर राम का दावा है कि जल संसाधन विभाग के पास मनपा के 411 करोड़ रुपये अतिरिक्त जमा हैं। लेकिन विभाग ने इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि पहले बकाया राशि का भुगतान जरूरी है। इस वर्ष 11.60 टीएमसी के स्वीकृत कोटे के मुकाबले अब तक 12.84 टीएमसी पानी का उपयोग किया जा चुका है। यानी 1.24 टीएमसी अतिरिक्त पानी लिया गया है। विभाग ने सवाल उठाया है कि इस अतिरिक्त पानी का भुगतान कौन करेगा।
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दो बार नोटिस हो चुका जारी
इसके अलावा मनपा और जल संसाधन विभाग के बीच हुए करार के अनुसार पुणे शहर से नदी में छोड़े जाने वाले गंदे पानी का शुद्धिकरण अनिवार्य है। लेकिन आरोप है कि लगभग 13 टीएमसी पानी बिना किसी प्रक्रिया के सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है, जिस पर मनपा पर जुर्माना भी लगाया गया है। यह राशि भी अब तक जमा नहीं की गई है। जल संसाधन विभाग ने बकाया वसूली के लिए पहले भी दो बार नोटिस जारी किए थे। बावजूद इसके अपेक्षित भुगतान नहीं किया गया है।
पुणे महानगरपालिका की समान जल आपूर्ति योजना के तहत अन्य सरकारी विभाग खुदाई के लिए निशुल्क अनुमति देते हैं, लेकिन जल संसाधन विभाग ने पर्वती क्षेत्र में अनुमति के लिए 10 लाख रुपये की मांग की है। ऐसी मांग करना उचित नहीं है। हम कोई व्यवसायिक उपयोग नहीं करते है। यह पानी पुणेकरों के लिए लिया जाता है। (नवल किशोर राम, आयुक्त, पुणे महानगरपालिका)
