Pune Water Crisis: भीषण गर्मी से सूखे जल स्रोत, 89 हजार लोग टैंकर के पानी पर निर्भर
Pune Water Crisis News: पुणे जिले में गर्मी के चलते जल संकट गहराता जा रहा है। आंबेगांव और जुन्नर तहसीलों में हालात चिंताजनक हैं, जहां हजारों लोग और पशुधन अब टैंकरों के पानी पर निर्भर हो गए हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे वॉटर क्राइसिस टैंकर सप्लाई (सौ. फाइल फोटो )
Pune Water Crisis Ambegaon Junnar Tanker: जिले में भीषण गर्मी के कारण जल स्तर गिरने से आंबेगांव और जुन्नर तहसीलों में स्थिति चिंताजनक हो गई है। आंबेगांव तहसील जिले में सर्वाधिक प्रभावित है, जहाँ एक महीने के भीतर टैंकरों की संख्या 3 से बढ़कर 21 तक पहुंच गई है।
वहीं, जुन्नर तहसील के 12 गांवों (गोद्रे, कोपरे, मांडवे, निमगिरी आदि) में टैंकर शुरू कर दिए गए हैं और 8 अन्य गांवों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। वर्तमान में जिले के लगभग 89 हजार नागरिक और दो हजार से अधिक पशुधन टैंकरों पर निर्भर हैं। प्रशासन दुर्गम बस्तियों और वाड़ियों में पानी पहुंचाने के लिए लगातार फेरे बढ़ा रहा है।
आंबेगांव में स्थिति बेकाबू
आंबेगांव तहसील में जल संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वहां टैंकरों की संख्या एक महीने में 3 से बढ़कर 21 हो गई है। वर्तमान में जिले के छह तहसीलों में 50 टैंकर संचालित हैं।
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भविष्य की चुनौतियों के लिए प्रशासन ने 776 गांवों हेतु 35.64 करोड़ की निवारण योजना बनाई है, जिसमें 3,330 कार्य प्रस्तावित हैं। जल जीवन मिशन से मुख्य गांवों को राहत मिली है, किंतु दुर्गम बस्तियां (वाड्या-वस्त्या) अब भी चुनौती बनी हुई हैं। जुन्नर तहसील में भी पारा चढ़ने के साथ ही जल संकट गहरा गया है। तहसील के 12 गांवों में टैंकरों की आपूर्ति शुरू कर दी गई है।
जुन्नर के पश्चिम और उत्तर भाग में त्राहि-त्राहि
जुन्नर पंचायत समिति की सभापति कमल शेलकंदे के अनुसार, विशेष रूप से तहसील के पश्चिमी हिस्से और उत्तरी विभाग के कोपरे-मांडवे क्षेत्र में स्थिति चिंताजनक है। गोद्रे, निमगिरी, हडसर और पेठेचीवाडी जैसे गांवों में जनसंख्या के आधार पर फेरे तय किए जा रहे हैं। साथ ही, खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत के लिए युद्ध स्तर पर निर्देश दिए गए हैं ताकि भूजल का कुछ सहारा मिल सके।
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दुर्गम क्षेत्रों में बूंद-बूंद को तरसे लोग
आंबेगांव और जुन्नर के पहाड़ी इलाकों में भूजल स्तर गिरने से कुएं-बोरवेल सूख चुके हैं। मालीण जैसी बस्तियों में पानी की भारी किल्लत है। प्रशासन युद्ध स्तर पर नए टैंकरों की मंजूरी और हैंडपंपों की मरम्मत कर रहा है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि मई की भीषण गर्मी के लिए पर्याप्त बजट और जल संकट से निपटने के लिए योजनाएं तैयार हैं, ताकि कोई भी नागरिक प्यासा न रहे।
