11 साल बाद बंद हुई पुणे स्मार्ट सिटी कंपनी, 980 करोड़ खर्च के बावजूद मूलभूत समस्याएं बरकरार
Pune Smart City Mission: करीब 980 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद पुणे स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन का सफर खत्म हो गया है। कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं, जबकि नागरिक आज भी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे स्मार्ट सिटी मिशन (सौ. सोशल मीडिया )
Pune Smart City Mission News: अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई पुणे स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड का सफर आखिरकार समाप्त हो गया है।
केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों के बाद इस विशेष उद्देश्य कंपनी को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया। कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी कार्यमुक्त कर दिया गया है। उन्हें अब महानगर पालिका में समायोजित करने की मंजूरी भी मिल चुकी है।
मूलभूत समस्याएं आज भी जस की तस
स्मार्ट सिटी अभियान के तहत पिछले 11 वर्षों में विभिन्न परियोजनाओं पर करीब 980 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद शहर की यातायात व्यवस्था, सड़कों पर गड्ढे, नियमित जलापूर्ति और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत समस्याएं आज भी बनी हुई हैं। यही कारण है कि इस पूरे अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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केंद्र, राज्य और मनपा ने दिया था विकास फंड
25 जून 2015 को शुरू हुए इस अभियान के लिए केंद्र सरकार ने 490 करोड़ रुपये, राज्य सरकार ने 245 करोड़ रुपये और पुणे महानगर पालिका ने 245.02 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए थे। इस प्रकार कुल 980.02 करोड़ रुपये का फंड शहर के विकास कार्यों पर खर्च किया गया।
मूल योजना के अनुसार, औंध, बाणेर और बालेवाडी क्षेत्र के विकास पर 3 हजार करोड़ रुपये और शेष पुणे के लिए 1 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। इस राशि से सड़कों का विकास, 24×7 जलापूर्ति योजना, आधुनिक यातायात नियंत्रण प्रणाली, ई-बस सेवा, स्मार्ट सड़कें और डिजिटल बुनियादी ढांचा विकसित करने जैसी परियोजनाएं शुरू की गई। हालांकि नागरिकों का कहना है कि इन परियोजनाओं का अपेक्षित लाभ उन्हें नहीं मिल पाया।
पुणे के लिए स्मार्ट सिटी सिर्फ एक जुमला रही, भारी-भरकम बजट के बावजूद 200 से 300 करोड़ रुपये प्रशासनिक कामों में उड़ा दिए गए। अब तक इस मिशन के नाम पर 980 करोड़ खर्च हुए। केंद्र के हाथ खीचने से जनता को इस मिशन से कुछ नहीं मिला और अधूरा काम अब मनपा के मत्थे मढ़ दिया गया है।
– विवेक वेलणकर (अध्यक्ष, सजग नागरिक मंच)
सरकारी निर्देशों के तहत ही स्मार्ट सिटी कंपनी को बंद कर इसके प्रोजेक्ट्स और संपत्तियों को मनपा को सौंपने की प्रक्रिया जारी है। मिशन के जो भी काम अधूरे रह गए हैं, उन्हें अब मनपा प्रशासन पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ अपने स्तर पर पूरा करेगा।
– नवल किशोर राम, आयुक्त, पुणे मनपा
2025 की डेडलाइन
केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन की सभी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक की समय सीमा निर्धारित की थी। समय सीमा समाप्त होने के बाद न तो अतिरिक्त अवधि दी गई और न ही कोई नया बजट जारी किया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने अप्रैल 2026 में कंपनी का संचालन बंद करने का निर्णय लिया। सरकारी आदेश के अनुसार स्मार्ट सिटी की सभी संपत्तियां, पूर्ण और चालू परियोजनाएं तथा उनके रखरखाव की जिम्मेदारी अब पुणे मनपा को सौंप दी गई है।
पूरे नहीं होने वाले प्रोजेक्ट
- मशीन के जरिए सड़कों की सफाई।
- स्मार्ट फार्मर्स मार्केट।
- बांबू गार्डन विकास।
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कई योजनाएं हुई रद्द मनपा पर बढ़ा बोझ
स्मार्ट सिटी के तहत कुल 52 परियोजनाएं पूरी की गई, लेकिन फंड की कमी और तकनीकी कारणों से कई महत्वपूर्ण योजनाएं बीच में ही रद्द करनी पड़ीं। इनमें मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, स्मार्ट फार्मर्स मार्केट, बैंबू गार्डन और पब्लिक आर्ट प्रोजेक्ट शामिल हैं। अब इन परियोजनाओं के रखरखाव का पूरा आर्थिक भार मनपा को उठाना होगा। वहीं, भारी खर्च के बावजूद नागरिक समस्याओं के समाधान नहीं होने पर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है।
