पुणे रियल इस्टेट (सौ. सोशल मीडिया )
Pune Property Rate Hike: पुणे में अपना आशियाना खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए आने वाला समय आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
शहर में घरों की कीमतों में और वृद्धि होने की प्रबल संभावना है, जिसका मुख्य कारण पंजीकरण एवं मुद्रांक शुल्क विभाग द्वारा ‘रेडी रेकनर’ दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी है।
विभाग ने आगामी 1 अप्रैल से पुणे में इन दरों को 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के सामने आते ही शहर में इसका विरोध शुरू हो गया है और विभिन्न संगठनों द्वारा इस वृद्धि को तुरंत रद्द करने की मांग की जा रही है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष यह वृद्धि औसतन 4.16 प्रतिशत थी।
पुणे में शहरीकरण और बुनियादी ढांचे का विकास काफी तेज है। पुरंदर में प्रस्तावित नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, शहर के बाहरी इलाके में निर्माणाधीन रिंग रोड और मेट्रो रेल का विस्तार इन परियोजनाओं के कारण शहर में प्रॉपर्टी की मांग लगातार बढ़ रही है।
इन सुविधाओं के चलते शहर के विभिन्न क्षेत्रों का परिदृश्य बदल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों का रुझान इन क्षेत्रों की ओर बढ़ा है। पंजीकरण और मुद्रांक शुल्क विभाग हर साल रेडी रेकनर दरों का निर्धारण करता है।
विरोध का मुख्य तर्क यह है कि निर्माण क्षेत्र पहले से ही चुनौतियों से जूझ रहा है। जमीन, सीमेंट, स्टील और श्रम की बढ़ती लागत के कारण घरों की कीमतें पहले ही ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए घर खरीदना और मुश्किल हो जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि रेडी रेकनर दरें बढ़ने से जमीन के बाजार भाव और बढ़ेंगे, जिसका सीधा बोझ खरीदारों पर पड़ेगा, दूसरी ओर, विभाग का तर्क है कि मेट्रो और रिंग रोड जैसी परियोजनाओं के कारण जमीन के वास्तविक दाम बढ़े हैं, जिन्हें रेडी रेकनर में अपडेट करना अनिवार्य है।
विनिर्माण सामग्रियों की कीमतें आसमान छू रही हैं। जमीन की कीमतें भी ऊंची है। घरों की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में रेडी रेकनर की दरें बढ़ाए जाने से प्रॉपर्टी की कीमतें भी अनावश्यक रूप से बढ़ेगी।
– स्थानीय बिल्डर, पुणे
आंकड़ों पर नजर डालें तो कोरोना महामारी के बाद वर्ष 2022-23 के दौरान सबसे बड़ी वृद्धि (9.13%) देखी गई थी। हालांकि, उसके बाद के दो वित्तीय वर्षों में दरों में कोई विशेष बदलाव नहीं हुआ। इस वर्ष नई दरें तय करने के लिए विभाग ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें साल भर हुए भूमि सौदों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। जिन क्षेत्रों में संपत्तियों के सौदे सबसे अधिक हुए हैं, वहां दरों में अधिक बढ़ोतरी की संभावना है।
विरोध का मुख्य तर्क यह है कि निर्माण क्षेत्र पहले से ही चुनौतियों से जूझ रहा है। जमीन, सीमेंट, स्टील और श्रम की बढ़ती लागत के कारण घरों की कीमतें पहले ही ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए घर खरीदना और मुश्किल हो जाएगा।
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विशेषज्ञों का कहना है कि रेडी रेकनर दरें बढ़ने से जमीन के बाजार भाव और बढ़ेंगे, जिसका सीधा बोझ खरीदारों पर पड़ेगा। दूसरी ओर, विभाग का तर्क है कि मेट्रो और रिंग रोड जैसी परियोजनाओं के कारण जमीन के वास्तविक दाम बढ़े हैं, जिन्हें रेडी रेकनर में अपडेट करना अनिवार्य है।