

महाराष्ट्र में नाम बदलने के सिलसले में अब पुणे स्टेशन का नाम जुड़ सकता है। पुणे के रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग उठ रही है। भाजपा की राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने मांग की कि पुणे रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर थोरले बाजीराव पेशवा के नाम पर रखा जाना चाहिए, जिन्हें 'बाजीराव-I' के नाम से भी जाना जाता है।
बाजीराव-I छत्रपति शाहूजी महाराज के राज्य में सन 1720 से 1740 के बीच प्रधानमंत्री थे। उन्हें उनकी सैन्य शक्ति के साथ-साथ मराठा साम्राज्य के विस्तार के लिए भी याद किया जाता है। इतिहास में दर्ज है कि थोरले बाजीराव पेशवा ने अपने जीवन में कोई भी युद्ध नहीं हारा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 23 जून को पुणे और सोलापुर रेलवे डिवीजन की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में कई संगठनों ने मांग की थी कि पुणे रेलवे स्टेशन का नाम थोरेल बाजीराव पेशवा के नाम पर रखा जाए। भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी ने कहा कि उन्होंने इस मांग को दोहराया है।
राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने कहा कि इस मांग के पीछे उनका उद्देश्य यह है कि लोगों को पुणे के गौरवशाली इतिहास के बारे में पता चले। उनका कहना है कि पुणे एक सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र है। यह आईटी उद्योग के लिए भी जाना जाता है, लेकिन यह जरूरी है कि पुणे समेत अन्य शहरों और प्रदेशों के लोग भी इस शहर के इतिहास को समझें और जानें।
दरअसल, पुणे शहर में छत्रपति शिवाजी महाराज और बाजीराव पेशवाओं का लंबा इतिहास रहा है। पुणे का शनिवारवाड़ा जिसके साथ मराठा साम्राज्य का समृद्ध इतिहास जुड़ा हुआ है। यहां पेशवा साशन की पुरानी हवेली है जो पेशवाओं के इतिहास को दर्शाता है। इसीलिए पुणे की ऐतिहासिक विरासत का हवाला देते हुए सांसद ने मांग की है कि पुणे जंक्शन का नाम बदला जाए।