मानसून से पहले पुणे मनपा की तैयारियों की खुली पोल, आधे से ज्यादा नाले अब भी गंदगी से भरे
Pune PMC Monsoon Preparation: पुणे महानगर पालिका की मानसून पूर्व तैयारियां अधूरी नजर आ रही हैं। नाला सफाई, स्टॉर्म वॉटर लाइन और चेंबरों की सफाई तय लक्ष्य से काफी पीछे होने से जलभराव का खतरा बढ़ गया।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune PMC Monsoon Preparation News: मानसून की दस्तक अब बेहद करीब है, लेकिन पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) की मानसून पूर्व तैयारियों ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।
मनपा ने दावा किया था कि 31 मई तक शहर के सभी छोटे-बड़े नाले, स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज लाइन और कल्वर्ट की सफाई शत-प्रतिशत पूरी कर ली जाएगी। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। मई खत्म होने में अब सिर्फ तीन दिन बचे हैं और शहर के आधे से ज्यादा हिस्सों में सफाई कार्य अब भी अधूरा पड़ा है।
लक्ष्य से काफी पीछे है सफाई का काम
पुणे मनपा की ताजा रिपोर्ट खुद इस बात को स्वीकार कर रही है कि नाले, बरसाती गटर और चेंबरों की सफाई का काम तय लक्ष्य से काफी पीछे है। ऐसे में जून की शुरुआत में अगर तेज बारिश होती है, तो पुणे के एक बार फिर जलमग्न होने की आशंका गहराती जा रही है, जिससे नागरिकों में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं।
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कागजी दावों पर प्रशासन का जोर हर साल पहली बारिश में पुणे के प्रमुख रास्ते तालाब बन जाते हैं, वाहन फंस जाते हैं और निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
इसके बावजूद इस बार भी समय रहते ठोस कार्रवाई के बजाय केवल कागजी दावों पर जोर दिया गया। सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नाला सफाई व्यवस्था हर साल क्यों फेल हो जाती है।
457 कल्वर्ट में से 158 बेहद संवेदनशील
शहर में कुल 457 कल्वर्ट है, जिनमें 158 स्थान अत्यंत संवेदनशील माने गए हैं। अब तक केवल 136 क्रिटिकल स्पॉट्स पर ही काम हुआ है, जबकि 22 जगहों पर काम अभी भी अधूरा है। वहीं स्टॉर्म वॉटर लाइन की स्थिति भी चिंताजनक है।
कुल स्टॉर्म वॉटर लाइन 2 लाख 40 हजार 116 मीटर में से सिर्फ 1 लाख 42 हजार 965 मीटर लाइन ही साफ हो सकी है, यानी 40 प्रतिशत से अधिक काम बाकी है। मनपा के आंकड़ों के अनुसार, शहर के 15 क्षेत्रीय कार्यालयों में कुल 129 नाले हैं, जिनकी लंबाई 2 लाख 34 हजार 512 मीटर है। इनमें से 2 लाख 21 हजार 500 मीटर की सफाई का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 58 हजार 761 मीटर नालों की ही सफाई पूरी हो पाई है।
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मरम्मत की गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान
- वेबर सफाई की स्थिति भी बेहतर नहीं है। कुल 60 हजार 301 चेंबरों में से 22 हजार से अधिक अब भी गंदगी से भरे हुए है। इससे पहली ही बारिश में सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनने की पूरी आशंका है।
- इसके अलावा, शहर में पाइपलाइन, केबल और ड्रेनेज कार्यों के चलते कई सड़कों की खुदाई जारी है, 15 मई की डेडलाइन खत्म होने के बाद भी काम अधूरा है, जबकि मरम्मत की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। एमएनजीएल को 30 जून तक खुदाई की अनुमति मिलने से स्थिति और गंभीर हो सकती है।
