Pune Municipal Corporation की कानूनी जीत, 400 करोड़ से अधिक राजस्व मिलने का रास्ता साफ
Bombay High Court ने विज्ञापनदाताओं की याचिका खारिज करते हुए PMC को 222 रुपये/वर्ग फुट की बढ़ी हुई दर से शुल्क वसूलने की अनुमति दी। इससे मनपा को 400 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व की उम्मीद है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे महानगरपालिका (सौ. सोशल मीडिया )
Pune News In Hindi: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) को एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत हासिल हुई है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने विज्ञापनदाताओं (एडवरटाइजर्स) द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें मनपा द्वारा निर्धारित विज्ञापन शुल्क दरों का विरोध किया गया था।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब मनपा के विज्ञापनदाताओं से प्रति वर्ग फुट विज्ञापन के लिए 222 रुपये की बढ़ी हुई दर से शुल्क वसूलने का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले से महानगर पालिका के राजस्व में भारी वृद्धि होने की संभावना है।
वर्षों से लंबित 100 करोड रुपये से अधिक की बकाया राशि भी वसूल करने का मार्ग खुल गया है। बकाया और वर्तमान शुल्क मिलाकर, पुणे मनपा को कुल 400 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।
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8 साल से पेंडिंग था यह मामला
- पुणे मनपा ने विज्ञापनदाताओं द्वारा लगाए गए होर्डिंग्स (विज्ञापन फलकों) के लिए प्रति वर्ग फुट के हिसाब से दरें निर्धारित की थीं। इस निर्णय का विज्ञापनदाताओं ने विरोध किया और दावा किया कि यह दर वृद्धि बहुत अधिक है।
- इसी विरोध के बाद विज्ञापनदाताओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और याचिका दायर की थी। यह मामला पिछले आठ वर्षों से कोर्ट में लंबित था, जिसके कारण मनपा की बढ़ी हुई शुल्क वसूली रुकी हुई थी।
मनपा की सशक्त कानूनी जीत
पुणे मनपा की विधि सलाहकार एड। निशा चव्हाण ने इस याचिका का लगातार और सशक्त फॉलोअप किया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मनपा द्वारा अदालत में पेश की गई प्रभावी दलीलों को स्वीकार किया और विज्ञापनदाताओं को याचिका को अमान्य करार देते हुए खारिज कर दिया है।
इस मामले में 64 सुनवाई हुईं
मनपा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एड। आशुतोष कुंभकोणी और एड। अभिजीत कुलकर्णी ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। मनपा की मुख्य विधि अधिकारी एड। निशा चव्हाण के मार्गदर्शन में, विधि विभाग ने वर्ष 2021 से इस मामले को प्राथमिकता देते हुए अदालत में बार-बार मांग की। इसी वजह से इस मामले में 64 सुनवाई हुईं, जिनमें से 60 सुनवाई वर्ष 2021 के बाद संचालित की गई।
अदालत की टिप्पणी से पीएमसी को राहत
अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि महानगर पालिका को लाइसेंस शुल्क लगाने, वसूल करने, बढ़ाने और संबंधित कार्रवाई को विनियमित करने का कानूनी अधिकार है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि विज्ञापन एजेंसियों द्वारा दायर यह याचिका ‘लक्जरी लिटिगेशन’ थी, क्योंकि ये एजेंसियां ग्राहकों से शुल्क वसूलने के बावजूद आधिकारिक शुल्क भरने में टालमटोल कर रही हैं।
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अब 222 की दर से होगी शुल्क की वसूली
- राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में मनपा के शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, जिसके कारण मनपा को पुराने दर यानी 111 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से ही शुल्क वसूलना पड रहा था, हाई कोर्ट के इस नवीनतम फैसले के बाद मनपा अब पुराने दर के बजाय 222 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से शुल्क वसूल सकती है, जिससे मनपा की आय में तेजी से वृद्धि होगी।
- हाई कोर्ट का अनुकूल फैसला आने के बाद, मनपा एक बार फिर नई शुल्क दरें निर्धारित कर सकती है। इसके साथ ही, प्रशासन जल्द ही अवैध होर्डिंग्स पर लगाए जाने वाले दंह (जुर्माना) की राशि बढ़ाने का प्रस्ताव भी तैयार कर सकता है। यह कदम अवैध होर्डिंग्स पर नियंत्रण लगाने और मनधा के राजस्व को अधिकतम करने में सहायक होगा।
