PMC Drain Cleaning Scam: नाला सफाई के नाम पर 50 करोड़ का खेल? पुणे मनपा पर नियमों के उल्लंघन के आरोप
Pune PMC Drain Cleaning Scam News: पुणे में मानसून पूर्व नाला सफाई कार्यों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। बिना मंजूरी करोड़ों के काम होने और कम दर वाले टेंडर से गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune PMC Drain Cleaning Scam: शहर में मानसून पूर्व नाला सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था के नाम पर एक बड़ा प्रशासनिक खेल खेला जा रहा है।
पुणे महानगर पालिका के गलियारों में इन दिनों यह चर्चा जोरों पर है कि कैसे नियमों और स्थायी समिति के निर्देशों को ठेंगा दिखाकर लगभग 50 करोड़ रुपये के कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन कार्यों के लिए अब तक स्थायी समिति की औपचारिक मंजूरी भी प्राप्त नहीं हुई है, उन्हें अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से आधे से अधिक निपटा दिया गया है। यह पूरी प्रक्रिया न केवल स्थापित नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि शहर की सुरक्षा और सार्वजनिक धन के सदुपयोग पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।
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PMC को मिले हैं 30 से 51 प्रतिशत तक कम दर पर टेंडर
इस पूरे विवाद की जड़ में वे टेंडर है, जो मूल अनुमानित लागत से 30 से 51 प्रतिशत तक कम दर पर भरे गए हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आमतौर पर इतनी कम दरों पर काम की गुणवत्ता बनाए रखना असंभव होता है।
इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए स्थायी समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए थे कि केवल वही टेंडर मंजूर किए जाएं, जो मूल लागत के आसपास या अधिकतम 2 से 3 प्रतिशत ही कम हो, इसके बावजूद, प्रशासन ने भारी छूट वाले संदिग्ध टेंडर्स को हरी झंडी दे दी।
राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि इन प्रस्तावों को जानबूझकर समिति के सामने पेश नहीं किया गया, क्योंकि वहां इन पर तीखे सवाल उठना तय था। अब रणनीति यह अपनाई जा रही है कि पहले गुपचुप तरीके से काम पूरा कर लिया जाए और बाद में ‘कार्यपूर्णता’ का हवाला देकर समिति से मजबूरी में कार्योत्तर मंजूरी हासिल कर ली जाए।
मनपा पर आंकड़ों की बाजीगरी के लगे आरोप
प्रशासन द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों की बाजीगरी भी इस मामले में गहरा संदेह पैदा करती है। अतिरिक्त आयुक्त पवनीत कौर द्वारा ली गई समीक्षा बैठक में जो जानकारी सामने आई, वह विरोधाभासों से भरी है। एक तरफ सिंहगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय क्षेत्र में 90 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर, ढोले पाटिल और विश्रामबाग वाडा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति मात्र 5 से 6 प्रतिशत ही दिखाई गई है।
वडगांव खुर्द स्थित सिंहगढ़ पीएमएवाई सोसायटी के पास बहने वाला नाला पिछले 15-20 दिनों से कचरे के कारण पूरी तरह जाम पड़ा है। गंदगी की वजह से यहां मच्छरों और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि नागरिकों की शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं।
– सचिन देशमुख, अध्यक्ष, सिंहगढ़ पीएमएवाई सोसायटी
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दावों की पोल खुली
हकीकत यह है कि प्री-मानसून बारिश ने ही मनपा के दावों की पोल खोल दी थी। शहर के 200 से अधिक स्थानों पर जलभराव हुआ, जबकि प्रशासन केवल 120 संवेदनशील स्थानों पर विशेष ध्यान देने की बात कह रहा था।
