पुणे महानगरपालिका में 40 ठेका कर्मचारियों की भर्ती पर बवाल, 1.20 करोड़ के प्रस्ताव पर सवाल
Pune Municipal Corporation में 40 ठेका कर्मचारियों की भर्ती के प्रस्ताव पर विवाद गहरा गया है। 1.20 करोड़ रुपये के इस प्रस्ताव को लेकर विरोधी इसे फिजूलखर्ची और आउटसोर्सिंग का मामला बता रहे हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे ड्रेन सफाई में देरी (सोर्सः सोशल मीडिया)
Pune PMC Contract Staff Hiring Issue: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) में 40 नए कर्मचारियों की ठेका पद्धति से नियुक्ति के प्रस्ताव ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। प्रशासन द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव को लेकर अब विरोध तेज हो गया है।
प्रस्ताव के तहत महापौर, उपमहापौर और अन्य जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों के कामकाज के लिए 20 कुशल और 20 अकुशल श्रमिकों की नियुक्ति की योजना बनाई गई है। इसके लिए लगभग 1.20 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है, जिस पर सवाल उठने लगे हैं।
आयुक्त के प्रस्ताव पर उठे सवाल
यह प्रस्ताव आयुक्त नवल किशोर राम द्वारा प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, विपक्षी नेताओं और कुछ जनप्रतिनिधियों ने इस पर कड़ा विरोध जताया है और इसे अनावश्यक खर्च बताया है।
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नियमित स्टाफ के होते हुए जरूरत क्यों?
विरोधियों का कहना है कि पुणे मनपा के पास पहले से ही पर्याप्त नियमित कर्मचारी मौजूद हैं। ऐसे में बाहरी ठेकेदारों के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति करना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे नियमित कर्मचारियों की कार्यक्षमता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
आउटसोर्सिंग पर बढ़ी बहस
इस प्रस्ताव के बाद मनपा में आउटसोर्सिंग नीति को लेकर भी बहस तेज हो गई है। आलोचकों का मानना है कि इस तरह की नियुक्तियां पारदर्शिता और जवाबदेही पर असर डाल सकती हैं, जबकि समर्थक इसे कामकाज में तेजी लाने का उपाय बता रहे हैं।
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आगे क्या होगा फैसला
अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस विरोध के बीच प्रस्ताव को आगे बढ़ाता है या उसमें बदलाव करता है। फिलहाल यह मुद्दा पुणे की सियासत में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला हो सकता है।
