Pune-Nashik रेल रूट बदलाव पर पाटिल का विरोध, किसानों के साथ अन्याय का आरोप

Pune-Nashik Railway Route में अचानक बदलाव पर पूर्व सांसद शिवाजीराव आढलराव पाटिल ने कड़ा विरोध जताया। किसानों के साथ अन्याय बताते हुए उन्होंने पुराने सरेखण पर वापस लौटने की मांग की।
Pune Nashik Railway
पुणे नासिक रेलवे (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune News In Hindi: प्रस्तावित पुणे-नाशिक रेलवे लाइन के रूट में अचानक किए गए बदलाव पर अब जोरदार विरोध शुरू हो गया है। पूर्व सांसद शिवाजीराव आढलराव पाटिल ने इस बदलाव को पुराने रूट से जुड़े किसानों के साथ 'अन्याय' बताते हुए पुरजोर विरोध जताया है।

उनका कहना है कि नए प्रस्ताव के तहत यह लाइन अब पुणतांबा, अहिल्यानगर होते हुए बनाई जा रही है, जिससे मूल मार्ग पर स्थित किसानों को भारी झटका लगा है। ढपाटिल ने मांग की है कि रेलवे लाइन को पुराने सरेखण से ही बनाया जाए और इसे मंचर-नारायणगांव के पश्चिमी हिस्से से होकर गुजारा जाए।

Pune Nashik Rail Route
पुणे नासिक रेलवे लाइन

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वे जल्द ही इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के प्रमुख नेताओं से मुलाकात कर अपनी मांग रखेंगे। परियोजना के इतिहास को याद करते हुए आढलराव पाटिल ने बताया कि सबसे पहले 1995 में तत्कालीन सांसद और रेल राज्य मंत्री सुरेश कलमाडी ने पुणे-नाशिक रेलवे लाइन का सर्वेक्षण कराया था।

प्लेटफॉर्म विस्तार स्टेशन: विले पार्ले, खार रोड, सांताक्रूज़, बांद्रा

15-कोच क्षमता: 4,380 यात्री

12-कोच क्षमता: 3,504 यात्री

क्षमता वृद्धि: 25%

कुल 15-कोच सेवाएँ : 211

स्लो कॉरिडोर सेवाएँ: 112

दैनिक अतिरिक्त क्षमता: 75,000 – 1,00,000 यात्री

बांद्रा फुटफॉल: 4–5 लाख प्रतिदिन

बाद में इसे पारंपरिक रेल के बजाय सेमी हाईस्पीड रेल मार्ग बनाने का निर्णय लिया गया। जब सुरेश प्रभु रेल मंत्री थे, तब परियोजना का सर्वेक्षण हुआ, बजटीय प्रावधान किया गया और इसे 'पिंक बुक' में शामिल किया गया। 2019 में परियोजना को गति मिली और भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों को लगभग 950 करोड़ का मुआवजा भी दिया गया।

नए रूट से बढ़ेगी दूरी और समय

पाटिल ने बताया कि दो सप्ताह पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि यह लाइन शिरूर-अहिल्यानगर शिडीं होते हुए जाएगी। इस नई घोषणा से जुन्नर, खेड, आंबेगांव, संगमनेर और सिन्नर तहसील के किसानों को बड़ा झटका लगा है, जिन्होंने मुआवजे के बाद अपनी जमीन खो दी थी। पाटिल ने नए रूट के व्यवहारिक पक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुराना मार्ग लगभग -250 किलोमीटर लंबा होता और यात्रा में लगभग 2 घंटे लगते।

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