Pune: पुराने चेहरे बाहर, नए अंदर: पुणे मनपा सभागृह में बदला सत्ता का समीकरण
Pune Municipal Elections में 165 नगरसेवक चुने गए हैं, जिनमें 97 पहली बार सभागृह पहुंचे हैं। अनुभवी नगरसेवकों की संख्या घटने से प्रशासनिक कामकाज में शुरुआती चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे न्यूज (सौ. डिजाइन फोटो )
Pune News In Hindi: महानगर पालिका चुनाव परिणाम घोषित हो गई हैं। पुणे मनपा के लिए कुल 165 नगरसेवक चुने गए हैं, जिनमें से 97 नगरसेवक पहली बार महापालिका के प्रशासनिक कामकाज में भाग लेंगे।
ऐसे में नव-निर्वाचित नगरसेवकों को महापालिका की कार्यप्रणाली समझने और अनुभव हासिल करने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। इस बार प्रभागों के आरक्षण और राजनीतिक दलों की रणनीति के कारण कई पूर्व नगरसेवक को दोबारा अवसर नहीं मिल सका। पिछले कार्यकाल के कुछ नगरसेवकों की पत्नियां या परिवार के अन्य सदस्य इस बार नगरसेवक के रूप में चुने गए हैं।
भाजपा के पास नेतृत्व की कमी नहीं
खास तौर पर भारतीय जनता पार्टी ने अपने मौजूदा न नगरसेवकों की उम्मीदवारी में बड़े बदलाव किए, जिसके चलते नए नगरसेवकों की संख्या अधिक हो गई है। सभागार में अनुभव रखने वाले भाजपा नगरसेवकों में रंजना टिलेकर, वर्षा तापकीर, गणेश बीडकर, श्रीनाथ भिमाले, राजाभाऊ बराटे और अनिल (बाँबी) टिंगरे शामिल है। इनके साथ मानसी देशपांडे, मंजुषा नागपुरे और स्मिता वस्ते का अनुभव भी उल्लेखनीय माना जा रहा है।
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भिमाले और बीडकर ने इससे पहले सभागृह नेता के रूप में जिम्मेदारी निभाई है। विपक्ष की ओर से अनुभवी नगरसेवको में कांग्रेस के अरविंद शिंदे, प्रशांत जगताप, राष्ट्रवादी कांग्रेस के निलेश निकम और बबुराव चांदेरे प्रमुख है। अरविंद शिंदे लगातार पाचवीं बार निर्वाचित हुए हैं और उन्होंने स्थायी समिति अध्यक्ष व गुटनेता के रूप में भी कार्य किया है।
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निलेश निकम दस वर्षों के बाद फिर से सभागृह में लौटे हैं। वे स्थायी समिति, शहर सुधार समिति के अध्यक्ष और उपमहापौर पद पर रह चुके हैं। बाबुराव चांदेरे और प्रिया गदादे लगातार चौथी बार चुने गए हैं, जिनमें चांदेरे ने भी स्थायी समिति के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सभाली है। अनुभवी नगरसेवकों की संख्या कम होने के कारण नए पार्षदों को प्रशासनिक कामकाज में दक्ष होने में कुछ समय लगेगा।
