देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ बड़ा एक्शन, सिराज-उल-उलूम फाउंडेशन के बैंक खाते और संपत्तियां फ्रीज
Jammu Kashmir Police Action: जम्मू-कश्मीर में सिराज-उल-उलूम वेलफेयर फाउंडेशन के खिलाफ NCLT ने कार्रवाई की है। जांच में पता चला कि, ये गैर-लाभकारी संस्था राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम कर रही थी।
- Written By: दिव्या सिंह
सिराज-उल-उलूम वेलफेयर फाउंडेशन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Jammu Kashmir NCLT Action News: जम्मू-कश्मीर में सक्रिय गैर-लाभकारी संस्था सिराज-उल-उलूम वेलफेयर फाउंडेशन के खिलाफ गंभीर आरोपों के बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने संस्था के मौजूदा प्रबंधन से सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार वापस लेते हुए उसका संचालन एक ऑफिशियल लिक्विडेटर को सौंप दिया है।
यह कार्रवाई मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) द्वारा की गई जांच के बाद हुई, जिसमें संस्था पर राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर ट्रिब्यूनल ने संस्था के सभी बैंक खातों, वित्तीय रिकॉर्ड और कॉर्पोरेट संपत्तियों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज करने के आदेश दिए हैं।
CID रिपोर्ट के बाद शुरू हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर CID ने 6 मार्च 2026 को अपनी रिपोर्ट में सिराज-उल-उलूम वेलफेयर फाउंडेशन की गतिविधियों पर गंभीर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया कि फाउंडेशन अपने घोषित उद्देश्यों से हटकर कार्य कर रहा था और कथित रूप से देश विरोधी गतिविधियों में शामिल था।
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जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संस्था का प्रबंधन कथित तौर पर वित्तीय रिकॉर्ड को एक पुराने ट्रस्ट के माध्यम से छिपाने की कोशिश कर रहा था। अधिकारियों के समक्ष पूछताछ के दौरान प्रबंधन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, जिसके बाद मामले को गंभीर श्रेणी में रखा गया।
मंत्रालय ने NCLT का दरवाजा खटखटाया
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स ने सीधे NCLT का रुख किया। मंत्रालय ने ट्रिब्यूनल को बताया कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो संभावित रूप से महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट किया जा सकता है और संस्था के फंड का दुरुपयोग हो सकता है। इस दलील को स्वीकार करते हुए ट्रिब्यूनल ने बिना पूर्व सूचना के संस्था की संपत्तियों और खातों को फ्रीज करने का आदेश जारी किया।
अधिकारियों की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की तैयारी
CID रिपोर्ट मिलने के बाद कॉर्पोरेट मामलों के महानिदेशक ने 23 मार्च 2026 को क्षेत्रीय निदेशक, चंडीगढ़ को निर्देश जारी कर कानून की धारा 272 के तहत आवश्यक कार्रवाई शुरू करने को कहा। साथ ही संस्था के निदेशकों और प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारियों (KMPs) की व्यक्तिगत संपत्तियों को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत फ्रीज और जब्त करने के विकल्पों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
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ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद ऑफिशियल लिक्विडेटर ने संस्था का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। पूर्व निदेशकों और प्रबंधन को उनके पदों से हटा दिया गया है। लिक्विडेटर अब संस्था की संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और फंड की विस्तृत सूची तैयार कर रहा है। साथ ही पूर्व प्रबंधन को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
