Pune MNC करेगी 100 करोड़ की बचत, फुरसुंगी डिपो के 28 लाख टन कचरे पर बायोमाइनिंग
Pune : फुरसुंगी-उरुली देवाची डिपो में जमा 28 लाख टन पुराने कचरे के निपटान के लिए Pune MNC 5 टेंडर जारी करेगी। ठेकेदारों की मिलीभगत से लागत बढ़ने का खतरा है, लेकिन सख्ती से 100 करोड़ की बचत संभव है।
- Written By: अपूर्वा नायक
(फाइल फोटो)
Pune News In Hindi: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) फुरसुंगी उरुली देवाची कचरा डिपो में जमा 28 लाख टन पुराने कचरे के जैविक उत्खनन (बायोमाइनिंग) और निपटान के लिए पांच अलग-अलग टेंडर जारी करने की तैयारी कर रही है।
प्रत्येक टेंडर लगभग 5।6 लाख टन कचरे की प्रक्रिया को कवर करेगा। महानगर पालिका अधिकारियों ने आगाह किया है कि यदि ठेकेदार आपस में ‘रिंग’ बना लेते हैं या एक ही ठेकेदार को अधिक टेंडर मिलते हैं, तो प्रति टन लागत 900 रुपये से अधिक हो सकती है।
ऐसी स्थिति में पीएमसी को लगभग 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। वहीं, नियमों का कड़ाई से पालन और अधिक ठेकेदारों की भागीदारी होने पर कम से कम 100 करोड़ रुपये की बचत संभव है। फुरसुंगी-उरुली डिपो में लंबे समय से खुले में कचरा जमा होने के कारण हवा और पानी प्रदूषित हो रहे थे।
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रिंग बनने से लागत बढ़ने का जोखिम
- आगामी टेंडरों में नियमावली के अनुसार प्रत्येक ठेकेदार को केवल एक टेंडर दिए जाने का प्रावधान है।
- हालांकि, कुछ ठेकेदार दो या अधिक टेंडरों का हिस्सा बनने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे ‘रिंग’ बनने और लागत बढ़ने का जोखिम है।
- केंद्र सरकार के गृह निर्माण और शहरी मामलों के मंत्रालय (महुआ) के नियमों के अनुसार, बायोमाइनिंग की दर प्रति टन 550 रुपये निर्धारित की गई है।
- यदि किसी टेंडर में ठेकेदार कम दर पर काम की पेशकश करता है और अन्य तैयार नहीं होते, तो अतिरिक्त आयुक्त को अनुमति से उसे दो टेंडर दिए जा सकते हैं।
- निवासियों की शिकायतों के बाद राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने पीएमसी को डिपो को अक्टूबर 2026 तक खाली करने का आदेश दिया था।
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15वें वित्त आयोग से मिले 154 करोड़ रुपये
पहले भी वर्ष 2016, वर्ष 2021 और वर्ष 2023 में तीन टेंडर जारी किए जा चुके थे, और कुल 31 लाख टन कचरे का बायोमाइनिंग पूरा हो चुका है। इस प्रक्रिया पर महानगर पालिका ने 244 करोड़ 13 लाख रुपये खर्च किए हैं। पुणे मनपा की 15वें वित्त आयोग के तहत बायोमाइनिंग के लिए 154 करोड़ रुपये भी प्रदान किए गए हैं। पीएमसी का लक्ष्य न केवल डिपो को खाली करना है, बल्कि कचरे की समस्या का स्थायी समाधान कर पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
