BMC चुनाव से पहले उद्धव को बड़ा झटका, पूर्व विधायक की बहू तेजस्वी घोसालकर ने ज्वाइन की भाजपा
Tejashwi Ghosalkar join BJP: बीएमसी चुनाव से पहले शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका लगा है। पूर्व पार्षद तेजस्वी घोसालकर ने विकास कार्यों की कमी का हवाला देते हुए भाजपा ज्वाइन की।
- Written By: आकाश मसने
तेजस्वी घोसालकर का भाजपा में स्वागत करते अमित साटम (सोर्स: सोशल मीडिया)
Shiv Sena UBT Leader Tejashwi Ghosalkar Joins BJP: बीएमसी चुनाव से ठीक पहले उद्धव ठाकरे की पार्टी को मुंबई में बड़ा झटका लगा है। शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व पार्षद तेजस्वी घोसालकर ने आज BJP मुंबई प्रेसिडेंट अमित साटम की मौजूदगी में भाजपा में प्रवेश किया। तेजस्वी घोसालकर 2017 में शिवसेना की पार्षद बनी थीं। पार्टी छोड़ने के अपने फैसले पर चुप्पी तोड़ते हुए उन्होंने खुलासा किया है कि यह फैसला भावनात्मक और विकास से जुड़े कारणों पर आधारित था।
पार्टी छोड़ने का भावनात्मक कारण
तेजस्वी ने कहा कि अभिषेक ही उन्हें सोशल वर्क में लाए थे। बता दें कि अभिषेक शिवसेना के पूर्व विधायक विनोद घोसालकर के बेटे थे,और तेजस्वी उनकी बहू हैं। अभिषेक की दो साल पहले बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस दर्दनाक घटना के बाद भी तेजस्वी ने अपना सामाजिक कार्य जारी रखा। हालांकि, उन्होंने दुख जताया कि अभिषेक की हत्या के मामले में इंसाफ नहीं मिल रहा था, क्योंकि यह मामला हाई कोर्ट और बाद में CBI में बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। इंसाफ में हो रही इस देरी से वह बेचैन महसूस कर रही थीं।
वार्ड में डेवलपमेंट का नाकाफी होना
भावनात्मक कारणों के साथ-साथ, घोसालकर ने वार्ड में डेवलपमेंट के कामों की कमी पर भी दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इलाके में डेवलपमेंट के काम नाकाफी थे और लोगों से जुड़े काम नहीं हो रहे थे। इन मुश्किल हालात और अपने दर्द की वजह से ही उन्हें यह कठोर फैसला लेना पड़ा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि काम करते समय कोई रुकावट या दबाव नहीं था।
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मुख्यमंत्री से की थी मुलाकात
इसी माहौल में, तेजस्वी घोसालकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। पार्टी बदलने के अपने फैसले के पीछे की मंशा बताते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि उन्हें अब CBI जांच में तेजी लाने और अभिषेक को जल्द इंसाफ दिलाने का मौका मिलेगा। साथ ही, वह वार्ड में डेवलपमेंट के कामों को भी जल्द से जल्द पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।
ठाकरे परिवार से बना रहेगा रिश्ता
राजनीतिक कदम उठाने के बावजूद, तेजस्वी ने ठाकरे परिवार के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि ठाकरे परिवार के साथ उनका रिश्ता बना रहेगा, और उन्हें छोड़ना मुश्किल था, क्योंकि वे एक परिवार थे। उन्होंने साफ किया कि कुछ मुश्किल हालात और दर्द की वजह से यह फैसला लेना पड़ा। तेजस्वी घोसालकर के इस बड़े राजनीतिक बदलाव से स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
