पुणे मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune Municipal Corporation Tender Ban: वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति के करीब आते ही पुणे महानगर पालिका के प्रशासन ने खजाने पर नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है।
मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए 1 मार्च से शहर के किसी भी नए विकास कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। आयुक्त के इस फैसले से न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है, बल्कि उन ठेकेदारों और रसूखदारों को भी बड़ा झटका लगा है जो मार्च एंडिंग के दौरान आनन-फानन में नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने की फिराक में रहते थे।
आयुक्त राम ने स्पष्ट किया है कि 1 मार्च के बाद किसी भी विभाग या क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा न तो नए टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे और न ही किसी नए कार्य का वर्क ऑर्डर जारी होगा।
यह निर्णय पुणे मनपा की वित्तीय स्थिति को संतुलित करने और केवल उन्हीं कार्यों को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया है, जो फिलहाल प्रगति पर हैं, इस आदेश के बाद अब किसी भी नए छोटे-बड़े विकास कार्य का प्रस्ताव अगले वित्तीय वर्ष के बजट में ही शामिल हो पाएगा।
– ललित कुमार, प्रशासनिक मामलों के जानकार
अक्सर यह देखा जाता है कि बजट के फंड को लैप्स होने से बचाने के लिए वित्तीय वर्ष के आखिरी महीने में बिना ठोस नियोजन के भारी संख्या में काम आवंटित कर दिए जाते हैं, जिससे काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
इस बार प्रशासन ने ऐसी किसी भी हड़बड़ी पर रोक लगाने के लिए यह ‘लक्ष्मण रेखा’ खींची है। इसके साथ ही, आयुक्त ने पुराने कार्यों के बकाया भुगतान को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। लेखा विभाग (अकाउंट्स डिपार्टमेंट) पर अंतिम समय के दबाव को कम करने के लिए 15 मार्च की डेडलाइन तय की गई है।
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ठेकेदारों और संबंधित विभागों को अपने सभी लंबित बिल इसी तारीख तक जमा करने होंगे। 15 मार्च के बाद किसी भी पुराने बिल को स्वीकार नहीं किया जाएगा, ताकि 31 मार्च तक सभी फाइलों का निपटारा सुचारू रूप से हो सके।