पुणे मनपा को 1000 करोड़ का झटका, ‘अस्थाई लेआउट’ विवाद से निर्माण राजस्व घटा

Pune Real Estate: पुणे में ‘अस्थाई लेआउट’ मंजूरी को लेकर विवाद से मनपा को चालू वित्त वर्ष में करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। निर्माण अनुमति शुल्क घटने से विकास योजनाओं पर असर की आशंका है।
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पुणे मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Pune PMC Revenue Loss: प्रशासनिक खींचतान और तकनीकी नियमों के कारण पुणे महानगर पालिका (मनपा) को चालू वित्त वर्ष में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। ‘अस्थाई लेआउट’ मंजूरी को लेकर जारी विवाद के चलते मनपा के खजाने को लगभग 1000 करोड़ रुपये की चपत लगी है।

मामला भूमि अभिलेख विभाग और मनपा के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर चल रहे मतभेद से जुड़ा है। भूमि अभिलेख विभाग ने अवैध निर्माण और जमीनों के अनधिकृत टुकड़ों की खरीद-बिक्री रोकने के उद्देश्य से एक सर्कुलर जारी किया था।

इसके तहत भूमि की पैमाइश के लिए स्थानीय निकाय से ‘अस्थाई लेआउट’ की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई। इस निर्णय के बाद निर्माण प्रस्तावों की प्रक्रिया धीमी पड़ गई, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर की रफ्तार पर असर पड़ा है।

राजस्व में भारी गिरावट

आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष मनपा ने निर्माण अनुमति शुल्क से 2,700 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था। वहीं इस वित्त वर्ष में अब तक केवल 1,685 करोड़ रुपये ही प्राप्त हो सके हैं। यह गिरावट लगभग 1000 करोड़ रुपये के नुकसान की ओर संकेत करती है।अतिरिक्त आयुक्त पृथ्वीराज बी. पी. ने स्वीकार किया कि निर्माण क्षेत्र में आई मंदी का सीधा प्रभाव मनपा की विकास योजनाओं पर पड़ सकता है।

वित्तीय संकट की आशंका

यदि राज्य सरकार के स्तर पर इस तकनीकी गतिरोध का समाधान शीघ्र नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में मनपा को वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट दिशानिर्देश और समन्वय से ही निर्माण क्षेत्र को गति और राजस्व को स्थिरता मिल सकेगी।

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