पुणे मनपा अब खुद लागू करेगी ‘रानी लक्ष्मीबाई महिला सशक्तिकरण योजना’, ठेकेदारों की छुट्टी
Pune Municipal Corporation ने ‘रानी लक्ष्मीबाई महिला सशक्तिकरण योजना’ को अब ठेकेदारों के बजाय सीधे लागू करने का निर्णय लिया है। योजना 8 से 14 मार्च तक 15 क्षेत्रीय कार्यालयों में संचालित होगी।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
PMC Rani Laxmibai Scheme: पुणे महानगरपालिका ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए चलाई जाने वाली ‘रानी लक्ष्मीबाई महिला सशक्तिकरण योजना’ को अब ठेकेदारों के बजाय स्वयं लागू करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
पहले इस योजना को लागू करने के लिए निकाली गई टेंडर दो निर्माण क्षेत्र के ठेकेदारों को मिली थीं, जिस पर स्थायी समिति की बैठक में गंभीर मतभेद और विवाद उत्पन्न हो गया था। इसी विरोध के चलते प्रशासन ने अब योजना को सभी 15 क्षेत्रीय कार्यालयों के स्तर पर सीधे मनपा के जरिए चलाने का फैसला किया है।
इस योजना के तहत प्रत्येक वार्ड के लिए 10 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसे समाज विकास विभाग के जरिए क्रियान्वित किया जाएगा। पुणे मनपा के हालिया चुनाव परिणामों के बाद बीजेपी 119 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, जिसके कारण स्थायी समिति सहित मनपा की सभी समितियों में उसका वर्चस्व स्थापित हो गया है। स्थायी समिति के 16 सदस्यों में से 10 सदस्य बीजेपी के हैं, जो नीतिगत निर्णयों में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
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रानी लक्ष्मीबाई योजना की शुरुआत 2016 में तत्कालीन स्थायी समिति अध्यक्ष अश्विनी कदम की पहल पर की गई थी, जिसके तहत महिलाओं के लिए शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, स्वास्थ्य शिविर और क्षमता निर्माण जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
कोरोना काल और प्रशासक राज के दौरान पिछले कुछ वर्षों से यह योजना पूरी तरह स्थगित थी, जिसे अब दोबारा शुरू किया गया है। स्थायी समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने जानकारी दी कि पहले यह योजना केवल 11 क्षेत्रीय कार्यालयों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 15 कार्यालयों के अधिकार क्षेत्र में लागू किया जाएगा।
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महिला सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर ध्यान
यह अभियान 8 से 14 मार्च के बीच आयोजित किया जाएगा और मनपा द्वारा स्वयं इसे संचालित करने से पूर्व में अनुमानित 4 करोड़ रुपये के खर्च में भी कमी आने की संभावना है। योजना के स्वरूप में बदलाव करते हुए अब इसमें डिजिटल साक्षरता और आत्मरक्षा के विशेष सत्रों को भी जोड़ने की योजना है। प्रशासन का मानना है कि ठेकेदारों की छुट्टी कर सीधे मनपा के जरिए योजना लागू करने से पारदर्शिता बढ़ेगी।
