मुफ्त कानूनी सेवा ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Pune District Legal Aid: न्याय चाहिए, पर जेब में पैसे नहीं… इस दुविधा में फंसे हजारों जरूरतमंदों के लिए पुणे जिला विधि सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) एक वरदान साबित हो रहा है। पिछले एक साल में, प्राधिकरण ने कुल 1,342 जरूरतमंदों को मुफ्त कानूनी सेवाएं प्रदान कर उनके लिए न्याय का मार्ग प्रशस्त किया है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 (ए) के अनुसार, प्रत्येक नागरिक को समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने का मौलिक अधिकार है। इसके तहत विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत पात्र लोगों को सरकारी खर्च पर वकील उपलब्ध कराए जाते हैं।
प्राधिकरण द्वारा जारी आंकड़ों में सबसे सुखद पहलू महिलाओं की सक्रियता है। कुल लाभार्थियों में 921 महिलाएं शामिल पुणे के हैं, जो यह दर्शाता है कि महिलाएं अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं।
प्रमुख जिला न्यायाधीश महेंद्र महाजन और प्राधिकरण की सचिव रेवती देशपांडे के मार्गदर्शन में यह प्रणाली न केवल दीवानी बल्कि फौजदारी मामलों में भी मुफ्त पैरवी करती है। न्यायालयों के अलावा, यह सेवा अब जेलों, पुलिस थानों, अस्पतालों और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी अपनी पहुंच बना चुकी है।
न्यायिक संघर्ष को कम करने के लिए प्राधिकरण केवल वकील ही नहीं, बल्कि उचित विधिक परामर्श भी देता है। पिछले वर्ष 923 लोगों को कानूनी सलाह दी गई, जिसमें 539 पुरुष और 384 महिलाएं शामिल थीं।
एड. इब्राहिम शेख के अनुसार, कई विवाद न्यायालय में मामला दर्ज होने से पहले ही उचित मार्गदर्शन और मध्यस्थता के माध्यम से आपसी सहमति से सुलझा लिए गए। इससे न केवल समय की बचत हुई, बल्कि पक्षकारों के बीच कड़वाहट भी कम हुई।
अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी के माध्यम से उन कैदियों को भी मदद दी जा रही है जो जमानत का खर्च वहन नहीं कर सकते, कोई भी व्यक्त्ति आर्थिक तंगी या किसी अन्य अक्षमता के कारण न्याय से वंचित न रहे। मुक्त वकील मिलने से पक्षकारों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे निडर होकर अपनी बात रख पाते है।
– जिला विधि सेवा प्राधिकरण, सचिव, रेवती देशपांडे
इसका लाभ लेने के लिए मानदंड निर्धारित किया गया है। इसमें मुफ्त कानुनी सहायता प्राप्त करने में महिलाएं, 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सदस्य, और मानव तस्करी या बंधुआ मजदूरी के शिकार व्यक्ति शामिल है।
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वहीं नागरिकों की वार्षिक आय 3 लाख रुपये तक है। वे भी इस सेवा के पात्र है। दिव्याग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, वरिष्ठ नागरिक, औद्योगिक श्रमिक और जेलों में बंद कैदी भी सरकारी खर्च पर वकील की मांग कर सकते हैं। वर्तमान में महाराष्ट्र राज्य विधि सेवा प्राधिकरण ने 179 पैनल वकीलों की नियुक्ति को मंजूरी दी है।