Maharashtra News: शिवसेना ने उतारे 100 से ज्यादा उम्मीदवार, भाजपा के लिए बढ़ी मुश्किल
Maharashtra Local Body Election: पुणे मनपा चुनाव में भाजपा और शिवसेना (शिंदे) के बीच गठबंधन को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। नामांकन के बाद भी दोनों दलों के रुख पर संशय बना हुआ है।
- Written By: अपूर्वा नायक
देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Pune News In Hindi: पुणे महानगरपालिका चुनाव में महायुति के दो सबसे बड़े घटक दल भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) मतदाताओं के लिए पहेली बनते जा रहे हैं।
नामांकन की तारीख गुजरने और चुनाव प्रचार शुरू होने के बाद भी यह साफ नहीं हो पाया है कि दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं या अलग अलग, ऐसे में मतदाता का रुख क्या होगा और यह दोनों दलों के उम्मीदवारों पर कितना असर डालेगा, इस पर चर्चा शुरू हो गई है।
भाजपा और शिवसेना के नेता भले ही गठबंधन नहीं टूटने का दावा कर रहे हों लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही इशारा कर रही है।शिवसेना ने 26 प्रभागों में 100 से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतारकर भाजपा के सामने सीधी चुनौती पेश कर दी है।
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अब स्थिति यह है कि यदि दोनों दलों के बीच गठबंधन हो भी जाता है, तो इतनी बड़ी संख्या में ‘एबी फॉर्म पा चुके उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने के लिए राजी करना दोनों ही पार्टियों के नेताओं के लिए कड़ी परीक्षा साबित होगा।
गठबंधन की राह में सबसे बड़ा रोड़ा यही है कि दोनों दलों के कितने उम्मीदवार पोछे हटते हैं, क्योंकि यह प्रक्रिया दोनों पार्टियों के लिए सिरदर्द बनने वाली है।दूसरी ओर शिवसेना ने भी लगभग 100 से ज्यादा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को एबी फॉर्म थमा दिए।
दिलचस्प बात यह है कि शिवसेना के नेता और उद्योग मंत्री उदय सामंत अब भी गठबंधन बरकरार होने का दावा कर रहे हैं।इस उलझन को सुलझाने के लिए अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे चर्चा करेंगे।लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि गठबंधन हो भी गया-
दोनों में आखिरी दिन तक भी नहीं बन पाई सहमति
फडणवीस ने पुणे में भाजपा और शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था।इसके बाद दोनों दलों के नेताओं के बीच सीटों के बंटवारे पर चर्चा शुरू हुई। सीटों की खींचतान की वजह से सीटों का बंटवारा लंबा खिंचता गया।
बाद में शिवसेना के कड़े रुख को देखते हुए भाजपा 15 सीटें देने को तैयार हुई लेकिन नामांकन के आखिरी दिन तक कोई सहमति नहीं बन पाई।नतीजा यह हुआ कि भाजपा ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए।
साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे दोनों दल
क्या दोनों दलों के सभी अतिरिक्त उम्मीदवारों के नामांकन वापस कराना मुमकिन होगा? अगर गठबंधन तय होता है, तो भाजपा को उन 15 से 20 सीटों से अपने उम्मीदवार हटाने होंगे जी शिवसेना के हिस्से में आएंगी, लेकिन शिवसेना के लिए यह काम ज्यादा मुश्किल होगा क्योंकि उसे 80 से ज्यादा सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने पड़ेंगे।
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नामांकन वापस लेने की यह पूरी प्रक्रिया शुक्रवार दोपहर 3 बजे तक पूरी करनी होगी, महज डेढ़ दिन के समय में सौ से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवारों की पीछे हटाना बेहद कठिन काम है।अब हालात ऐसे हैं कि गठबंधन होने के बावजूद चुनावी मैदान में ‘तीर’ छूट चुके हैं, अगर इन उम्मीदवारों के नामांकन रद्द कराने हैं, तो पाटी को सीधे चुनाव अधिकारियों को पत्र देखन सामूहिक रूप से उम्मीदवारी रद्द करने का कड़ा फैसला लेना पड़ सकता है-
