Vaishali Totewar Bribery Case: पुलिस महकमे में हड़कंप, ACB ने पुणे आयुक्तालय में रिश्वत लेते अधिकारी को दबोचा
Vaishali Totewar Bribery Case: पुणे में एसीबी ने आर्थिक अपराध शाखा की एपीआई वैशाली तोटेवार को 28 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा। मामले ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे ACB रिश्वत मामले में पुलिस अधिकारी गिरफ्तार (सौ. डिजाइन फोटो )
Vaishali Totewar Bribery Case in Pune: पुणे पुलिस आयुक्तालय से भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है।
पुणे शहर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में तैनात सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) वैशाली तोटेवार को एसीबी ने 28 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है।
खास बात यह है कि यह कार्रवाई सीधे पुलिस आयुक्तालय परिसर में हुई, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह पूरा मामला आर्थिक अपराध शाखा से जुड़े एक संवेदनशील प्रकरण की जांच से जुड़ा है।
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आरोप है कि संबंधित केस में कार्रवाई को प्रभावित करने और राहत देने के नाम पर कुल 30 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी। इसमें से 2 लाख रुपये पहले ही लिए जा चुके थे, जबकि शेष 28 लाख रुपये की डील तय की गई थी।
मुंबई लोहमार्ग पुलिस (रेलवे पुलिस) में तबादला
बताया जा रहा है कि वैशाली तोटेवार का हाल ही में मुंबई लोहमार्ग पुलिस (रेलवे पुलिस) में तबादला कर दिया गया था और उन्हें पुणे पुलिस बल से कार्यमुक्त भी कर दिया गया था। इसके बावजूद उन्होंने कथित तौर पर पुराने मामले में हस्तक्षेप कर रिश्वत की रकम स्वीकार की।
अधिकारियों ने बिछाया जाल
यह तथ्य जांच एजेंसियों के लिए भी हैरानी का विषय बना हुआ है कि कार्यमुक्त होने के बाद भी एपीआई इस प्रकरण में किस भूमिका में सक्रिय थीं। सूत्रों के अनुसार, रिश्वत की यह रकम एक निजी व्यक्ति के माध्यम से ली जा रही थी।
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एसीबी को इस लेन-देन की पुख्ता सूचना मिली थी, जिसके बाद अधिकारियों ने जाल बिछाया, तय योजना के तहत जैसे ही रकम सौंपी गई, एसीबी की टीम ने मौके पर छापा मारकर वैशाली तोटेवार और उनके सहयोगी निजी व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। दोनों को पूछताछ के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह रकम आखिर किस केस को प्रभावित करने के लिए ली जा रही थी और क्या इसके पीछे किसी बड़े आर्थिक अपराध या प्रभावशाली नेटवर्क का हाथ है।
