पुणे मनपा के 48 करोड़ के बायोगैस टेंडर में गड़बड़ी के आरोप, अनुभवहीन कंपनियों के भाग लेने से ‘रिंग’ की चर्चा
Pune Municipal Corporation: पुणे मनपा के 300 टन क्षमता के CBG प्लांट हेतु जारी 48 करोड़ के टेंडर में अनियमितता के आरोप लगे हैं। बिना अनुभव वाली 3 कंपनियों द्वारा टेंडर भरने से सवाल उठे हैं।
- Written By: रूपम सिंह
बायोगैस टेंडर प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Pune Municipal Corporation Biogas Tender Controversy: पुणे महानगर पालिका द्वारा गीले कचरे से 300 टन क्षमता का कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन प्लांट स्थापित करने के लिए जारी 48 करोड़ रुपये के टेंडर में बड़ी गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। टेंडर का ‘ए’ पैकेट खोले जाने के बाद इसमें भाग लेने वाली तीनों कंपनियों के अनुभव और पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मनपा गलियारों में इस पूरी प्रक्रिया को लेकर ‘रिंग’ बनाए जाने की जोरदार चर्चा है।
निजी जमीन पर होंगे प्लांट
पुणे मनपा शहर से 75 किलोमीटर के दायरे में निजी जमीन पर यह प्लांट लगवाना चाहती है। इसके लिए ठेकेदार को ही जमीन उपलब्ध करानी होगी। केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड में से मनपा निर्माण कार्य के लिए 48 करोड़ रुपये की सहायता देगी।
इसके अतिरिक्त, प्रति टन 600 रुपये टिपिंग फीस और अधिकतम 150 किलोमीटर के दायरे के लिए 7.40 रुपये प्रति टन परिवहन खर्च भी दिया जाएगा। गौरतलब है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए स्वयंभू ट्रांसपोर्ट, साई पवनी कंस्ट्रक्शन इंडिया प्रा. लि. और कृष्णाई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा। लि। ने टेंडर भरा है।
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चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से किसी भी कंपनी के पास कचरा प्रसंस्करण का प्रत्यक्ष अनुभव नहीं है। स्वयंभू ट्रांसपोर्ट को छोड़कर शेष दोनों कंपनियां प्री-बिड बैठक में भी शामिल नहीं हुई थीं। सुस स्थित बायोगैस प्रकल्प की संचालनकर्ता कंपनी ने प्री-बिड बैठक में हिस्सा लेने के बावजूद टेंडर नहीं भरा, जिससे पूरे मामले में संदेह और गहरा गया है।
कंपनी विशेष को फायदा पहुंचाने का आरोप
सूत्रों के अनुसार, शुरुआती नियमों के तहत पार्टनरशिप के जरिए टेंडर दाखिल किए गए हैं, लेकिन यह चर्चा आम है कि पूरी प्रक्रिया सिर्फ एक चुनिंदा कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए रची गई है। आरोप है कि केवल प्रतिस्पर्धा का दिखावा करने के लिए दो अन्य कंपनियों को मैदान में उतारा गया है, जिन्हें तकनीकी जांच के चरण में बाहर किए जाने की पूरी आशंका है। इसके बाद केवल एक ही बची हुई कंपनी की वित्तीय बोली को मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।
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तकनीकी जांच के बाद होगा अंतिम फैसला
ठोस कचरा व्यवस्थापन विभाग के उपायुक्त संतोष वारुले ने बताया कि फिलहाल ‘ए’ पैकेट खोला गया है और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही वित्तीय बोली (‘बी’ पैकेट) खोली जाएगी। वहीं, मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने कहा कि सभी प्रस्तावों की व्यवहार्यता और वित्तीय दरों का गहन परीक्षण किया जाएगा। यदि दरें व्यावहारिक और स्वीकार्य नहीं पाई गईं तो टेंडर को पूरी तरह रद्द करने का विकल्प भी खुला रहेगा।
