

Pune Municipal Corporation: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) की सुरक्षा व्यवस्था सोमवार को विशेष एवं सामान्य सभा के दौरान राजनीतिक टकराव का प्रमुख मुद्दा बन गई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं के विरोध-प्रदर्शन और सभागृह के प्रवेश द्वार तक क पहुंचने की घटना के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष ने प्रशासन पर सुरक्षा में गंभीर चूक का आरोप लगाया। जवाब में मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने दो टूक कहा कि वर्तमान में तैनात अधिकांश सुरक्षाकर्मी जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर भर्ती किए गए हैं।
उन्होंने कहा, 'यदि सुरक्षा कर्मियों की भर्ती का पूरा अधिकार प्रशासन को दिया जाए, तो शिकायत की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।' आयुक्त के इस बयान से सदन में सियासी माहौल और गर्म हो गया। विवादित भर्ती प्रक्रिया को लेकर 45 मिनट तक हंगामा सोमवार को पीएमपीएमएल से संबंधित विशेष बैठक चल रही थी।
इसी दौरान मनसे कार्यकर्ता कथित विवादित भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने की मांग लेकर मनपा मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने सभागृह के बाहर नारेबाजी की और प्रवेश द्वार तक पहुंचने का प्रयास किया। सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया, लेकिन करीब 45 मिनट तक प्रदर्शन जारी रहा। इस घटना ने मनपा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
बढ़ते हंगामे के बीच महापौर मंजूषा नागपुरे ने हाल के महीनों में मिली बम की फर्जी धमकियों का उल्लेख करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रवेश द्वारों की संख्या सीमित करने, प्रत्येक गेट पर सघन जांच तथा एक महीने के भीतर सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने को कहा।
सदन नेता धीरज घाटे ने कहा कि भाजपा के शहर अध्यक्ष एवं पूर्व बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारी सभागृह तक कैसे पहुंच गए। उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई और तबादले की मांग की।
विपक्ष के नेता निलेश निकम ने भी प्रशासन को घेरते हुए कहा कि नागरिकों और आंदोलनकारियों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होने के कारण उन्हें पुणे मनपा मुख्यालय आकर प्रदर्शन करना पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों से संवाद बढ़ाने पर जोर दिया।