पीएमआरडीए (सौ. सोशल मीडिया )
PMC Villages Building Permission: पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) में शामिल किए गए 23 गांवों के हजारों नागरिक निर्माण अनुमति की प्रशासनिक उलझनों में फंस गए हैं।
घर बनाने की योजना बना रहे लोगों को महीनों से अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनका ‘घर का सपना’ अधूरा रह गया है।
जून 2021 में इन गांवों को आधिकारिक तौर पर मनपा में शामिल किया गया था। हालांकि विकास योजना (डीपी) तैयार करने की जिम्मेदारी पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) के पास होने के कारण निर्माण अनुमति के अधिकार मनपा को नहीं मिल पाए हैं। यही कारण है कि नागरिकों को मूलभूत सेवाओं के लिए मनपा और निर्माण अनुमति के लिए पीएमआरडीए जाना पड़ रहा है।
सड़क, पानी और ड्रेनेज जैसी सुविधाओं के लिए लोग मनपा कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन भवन निर्माण की मंजूरी के लिए उन्हें पीएमआरडीए के पास जाना पड़ता है। इस दोहरी प्रक्रिया से नागरिकों के साथ-साथ डेवलपर्स भी परेशान हैं और कई परियोजनाएं अटक गई हैं।
पिछले साल सितंबर में हडपसर क्षेत्र के दौरे के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस विसंगति को खत्म करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि निर्माण अनुमति के अधिकार तुरंत मनपा को सौंपे जाएं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
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नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से जल्द निर्णय लेने की मांग की है ताकि निर्माण कार्यों को गति मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकारों का स्पष्ट हस्तांतरण होने से न केवल नागरिकों की परेशानी कम होगी बल्कि इन गांवों का नियोजित विकास भी तेज हो सकेगा।