पुणे में PDCC बैंक चुनाव से पहले 9 दिग्गजों की उम्मीदवारी पर कानूनी संकट, 10 साल के नियम ने बढ़ाई हलचल

Pune Bank News: पुणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक चुनाव से पहले आरबीआई के 10 साल के कार्यकाल नियम से कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे और वलसे पाटिल समेत 9 दिग्गजों की उम्मीदवारी पर संकट छाया।
Legal crisis over Pune District Central Bank elections: Dattatray Bharne affected by the 10-year rule
पुणे जिला मध्यवर्ती बैंक चुनाव कानूनी विवादसोर्स- सोशल मीडिया
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PDCC Bank Election Legal Controversy: स्थानीय पुणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (पीडीसीसी) के चुनाव से पहले सहकारी क्षेत्र के दिग्गजों की उम्मीदवारी पर कानूनी संकट मंडराने लगा है।

सहकारी बैंकों के संचालकों के लिए लागू 10 साल के कार्यकाल की सीमा के नियम के कारण कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे, पूर्व मंत्री दिलीप वलसे पाटील और पूर्व विधायक संग्राम थोपटे समेत 9 मौजूदा संचालकों की पात्रता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

लातूर जिला बैंक में सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील और 8 संचालकों पर आरबीआई की कार्रवाई के बाद पुणे में भी यह मुद्दा गरमा गया है। पुणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (पीडीसीसी) के मौजूदा संचालक मंडल में कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे, पूर्व मंत्री दिलीप वलसे पाटील, पूर्व विधायक संग्राम थोपटे, दिगंबर दुर्गाडे, रमेश थोरात, रेवणनाथ दारवटकर, दिलीप मोहिते, संजय काले और आप्पासाहेब जगदाले शामिल हैं। बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सभी नेताओं की - संचालक के रूप में जानकारी दर्ज है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 10 साल के कार्यकाल की कानूनी सीमा वाले नियम के कारण इन सभी दिग्गजों के राजनीतिक भविष्य और आगामी चुनाव में उनकी उम्मीदवारी पर संकट के बादल छा गए हैं।

लातूर जिला सहकारी बैंक में नियमों के उल्लंघन पर आरबीआई ने 18 सितंबर को सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील समेत 8 संचालकों को बर्खास्त कर दिया। यह कार्रवाई मुंबई उच्च न्यायालय की छत्रपति संभाजीनगर पीठ के निर्देशों के बाद हुई है। लातूर की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब पुणे जिला बैंक के चुनाव में भी 10 साल के नियम को सख्ती से लागू करने की चर्चा तेज हो गई है।

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आज प्रस्ताव दाखिल करने की अंतिम तिथि

पीडीसीसी बैंक ने वर्ष 2026-27 से 2031-32 की अवधि के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की है। संस्था प्रतिनिधियों के प्रस्ताव दाखिल करने की अंतिम तिथि 22 सितंबर निर्धारित की गई है।

एक तरफ चुनाव की तैयारियां जोरों पर है, वहीं दूसरी तरफ 10 साल के नियम का कानूनी पेच गहरा गया है। लातूर मामले की तरह यह विवाद भी न्यायालय या प्रशासनिक स्तर पर जाने की पूरी संभावना है।

डीसीसी बैंक के 21 सदस्यीय संचालक मंडल का चुनाव पुणे जिले की राजनीति के लिए काफी अहम माना जाता है। कई दिग्गज नेताओं ने सहकारिता से ही अपना राजनीतिक वर्चस्व बनाया है। हालांकि, 10 साल के नियम के आधार पर 9 निदेशकों को अभी अयोग्य मानना जल्दबाजी होगी।

अंतिम निर्णय कानूनी गणना और नियमों के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा, यदि पुराने निदेशकों की उम्मीदवारी रद्द होती है, तो नए चेहरों को मौका मिलेगा, इससे जिले के राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

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